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छात्र सौरभ के कोल्ड्रिंक में मिला दी थी नींद की गोली, फिर गला काटकर खाई में फेंक दी थी लाश

सौरभ केरकेट्टा हत्याकांड के 4 आरोपियों को कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा, अप्रैल 2012 में हुई थी नृशंस हत्या

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अंबिकापुर. शहर के बहुचर्चित सौरभ केरकेट्टा हत्याकांड के मामले में शनिवार को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश नीरू सिंह ने फैसला सुनाया। उन्होंने मामले के सभी आरोपियों को अपहरण, हत्या व षडंयत्र रचने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है।

स्कूल परिसर के पास से वन विभाग के एक क्लर्क के 13 वर्षीय पुत्र सौरभ का आरोपियों ने 10 अप्रैल 2012 को अपहरण कर हत्या कर दी थी। हत्या से पहले उन्होंने कोल्डिं्रक में नींद की गोलिया मिला दी थी। इसके बाद ब्लेड से गला काटकर शव खाई में फेंक दिया था। उसका शव तीन दिन बाद बलरामपुर जिले के आरा पहाड़ी के खाई में मिला था। ऋतिक हत्याकांड के बाद इस वारदात ने भी शहर को हिलाकर रख दिया था।


वन संरक्षक कार्यालय में कार्यालय अधीक्षक के पद पर पदस्थ लाल साय केरकेट्टा का बड़ा पुत्र सौरभ ओरिएंटल पब्लिक स्कूल में कक्षा आठवीं का छात्र था। वह 10 अप्रैल की सुबह 6.20 बजे स्कूल जाने घर से पैदल निकला था। वह स्कूल से लगभग 1.30 बजे घर वापस लौट जाता था। लेकिन 10 अप्रैल को वह वापस नहीं आया था।

इस दौरान उसकी मां निर्मला केरकेट्टा जो शिक्षाकर्मी है वह घर वापस लौटी तो लगभग 2 बजे के बीच मोबाइल क्रमांक 8516048405 से एक अज्ञात व्यक्ति का फोन उसके घर के लैण्डलाइन नम्बर पर आया। उसने कहा कि घर के गेट के बगल में एक लिफाफा पड़ा हुआ है। उसे जाकर उठा लो। उसने इसकी सूचना तत्काल मोबाइल पर पति लाल साय को दी।

लिफाफा मिलने के बाद उसने इसकी जानकारी तत्काल वन विभाग के आला अधिकारियों को दी। इसके बाद परिजन अधिकारियों के साथ एसपी ऑफिस पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी तात्कालीन एसपी को दी। तात्कालीन एसपी के निर्देश पर कोतवाली में अज्ञात अभियुक्तों के खिलाफ धारा 364 (क) के तहत जुर्म दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।

विवेचना के दौरान मोबाइल नम्बर के कॉल डिटेल निकलवाए गए तो सिम धारक का नाम नेमचंद रावटे होने की जानकारी मिली। नेमचंद ने पुलिस को बताया कि वह इस सिम का उपयोग नहीं कर रहा है। उसका लाइसेंस व पहचान पत्र रामानुजगंज जाते समय अंबिकापुर में गिर गया था। फिर पुलिस को उक्त मोबाइल नम्बर का आईएमइआई नम्बर प्राप्त होने पर पता चला कि मोबाइल पर किसी अन्य सिम का उपयोग किया जा रहा है।

इसके आधार पर जिस मोबाइल नम्बर से बातचीत की गई थी वह दीपक पैकरा का होना पाया गया। सिम नेमचंद व उसकी पत्नी के नाम से फर्जी तरीके से निकाला गया था। दीपक पैंकरा की तलाश कर जब उसे पुलिस ने गिरफ्तार किया तो पता चला कि वह देव होटल में फर्जी रूप से अपना नाम अर्जुन कुमार गुप्ता बताकर रूका हुआ था।

उसने बताया कि सौरभ केरकेट्टा के पिता लालसाय से उसकी पुरानी रंजिश है। रंजिश वश तथा ७० लाख रुपए फिरौती रकम प्राप्त करने के लिए उसने अपने दोस्त दशरथ दास, संजय दास एवं राजेन्द्र दास के साथ मिलकर सौरभ के अपहरण व हत्या की योजना बनाई थी। उसने दोस्तों को 30-30 हजार रुपए देने का लालच दिया था।

फिर वह 10 अप्रैल को सौरभ को बाइक क्रमांक सीजी 15 सीडी 7487 से घुमाने के बहाने बैठाकर ग्राम कुन्दीकला दशरथ दास के घर ले गया। यहां पर दशरथ, संजय दास व राजेन्द्र दास पहले से मौजूद थे। यहां से सभी सौरभ अंबिकापुर से करीब 30 किमी दूर आरा पहाड़ घुमाने के बहाने दो बाइक से ले गये। इसके बाद सभी ने बाइक आरा पहाड़ के नीचे खड़ी की व सौरभ को पहाड़ के ऊपर ले गए।


कोल्डिं्रक में मिलाई थी नींद की गोली
रास्ते में हीसौरभ को पहले से फ्रुटी में जहर मिलाकर पिलाने की कोशिश की, इस पर सौरभ ने थोड़ी फ्रुटी पीने के बाद कहा कि अजीब सा लग रहा है। उसने फ्रुटी नहीं पी। इसके बाद थम्सअप में नींद की गोली मिलाकर उसे पिलाया तो सौरभ कुछ देर बाद बेहोश हो गया।

तब दीपक पैकरा, संजय दास एवं राजेन्द्र दास ने सौरभ का हाथ-पैर पकड़कर ब्लेड से उसका गला काट दिया, इससे उसकी मौत हो गई। आरोपियों ने शव को 25 फिट नीचे खाई में डाल दिया गया था। पुलिस को शव तीन दिन बाद आरा पहाड़ी के खाई में मिला था। जिसे काफी मशक्कत के बाद निकाला गया था। पुलिस ने चारों आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान आए साक्ष्य के आधार पर प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश नीरू सिंह ने आरोपियों को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास व 100-100 रुपए का जुर्माना, 364 (क) के तहत आजीवन कारावास व जुर्माना, 120 बी के तहत आजीवन कारावास व जुर्माना, धारा 201 के तहत 5 वर्ष की सजा सुनाई। मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से शासकीय अधिवक्ता आशीष गुप्ता व विवेक सिंह ने पैरवी की।


मेमोरेंडम कथन के आधार पर दी सजा
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने मामले में कोई भी आई-विटनेस नहीं होने पर मेमोरेंडम कथन को महत्वपूर्ण माना। मेमोरेंडम कथन में पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी दीपक पैकरा का कथन दर्ज करने के साथ ही उसकी निशानदेही पर उसकी बाड़ी से मृतक का बस्ता, स्कूल ड्रेस व कॉपी-पुस्तक बरामद किया था। उसे ही पूरे मामले में सजा सुनाने के लिए महत्वपूर्ण माना गया।

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