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ऐसा भी बीएड कॉलेज जो शादीशुदा छात्राओं से 2 साल तक प्रेग्नेंट नहीं होने का लेता है शपथ-पत्र

ऐसा लगता है जैसे संविधान से भी ऊपर है छत्तीसगढ़ का यह शिक्षा महाविद्यालय, 8 माह की गर्भवती छात्रा से कराया था डांस

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Saint Harkeval Shiksha Mahavidyalaya

Saint Harkevel B.Ed college

अंबिकापुर. राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद और सरगुजा विश्वविद्यालय के ऑर्डीनेंंस को दरकिनार कर संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय शादीशुदा छात्राओं से दो वर्ष के पाठ्यक्रम के दौरान गर्भवती नहीं होने का शपथ-पत्र लेता है। महाविद्यालय 10 रुपये के स्टाम्प पेपर पर शपथ पत्र में प्रवेशार्थी को बताना होता है कि 'मैं प्रवेश के दौरान गर्भवती नहीं हूं और बीएड अंतिम वर्ष तक गर्भवती नहीं रहूंगी।छात्राओं द्वारा शपथ पत्र में वचन लिया जाता है कि गर्भवती होने की स्थिति में 'मैं खुद जिम्मेदार रहूंगी।


सरगुजा विश्वविद्यालय में पदस्थापना विभाग के ओएसडी डीपीएस तिवारी ने बताया कि संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय का शासी निकाय शपथ पत्र महाविद्यालय संचालन के लिए तैयार किया गया है।

सरगुजा विश्वविद्यालय द्वारा कोई भी शपथ पत्र लेने का निर्देश नहीं दिया गया है। एनसीटीई (राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद) द्वारा प्रवेश के लिए कोई भी शपथ पत्र जारी नहीं किया जाता है। सरगुजा विश्वविद्यालय द्वारा बीएड पाठ्यक्रम के लिए जारी आर्डीनेंस में भी शपथ पत्र लेने कोई व्यवस्था नहीं है।


यह है राजपत्र के लिए निर्देश
भारत का राजपत्र के 25वें पृष्ठ में विद्यार्थियों के कार्य दिवस की जानकारी दी गयी है। दो वर्षीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के लिए प्रत्येक वर्ष 200 दिन कार्य दिवस निर्धारित है। प्रत्येक सप्ताह अर्थात छह दिन में 36 घंटे सभी शिक्षक, विद्यार्थी उपस्थित रहेंगे। पाठ्यचर्यात्मक कार्य एवं प्रायोगिक कार्य के लिए छात्र-अध्यापकों की न्यूनतम उपस्थिति 80 फीसदी होगी। स्कूलबद्ध प्रशिक्षण के लिए न्यूनतम उपस्थिति 90 फीसदी होगी।


पाठ्यक्रम के लिए एक अतिरिक्त वर्ष की है व्यवस्था
एनसीटीई ने दो वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए एक अतिरिक्त वर्ष दिया हुआ है। दो वर्षों में पाठ्यक्रम पूरा नहीं होने की स्थिति में विद्यार्थी को एक वर्ष और मिला है। अनुत्तीर्ण, बीमार, विशेष स्थितियों में तीसरे वर्ष की सुविधा मिली है। पाठ्यक्रम के दौरान छात्रा के गर्भवती होने कि स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त एक वर्ष की व्यवस्था दी गयी है।


गर्भवती नहीं होने का शपथ पत्र लेने का नहीं है प्रावधान
सरगुजा विश्वविद्यालय के कुलसचिव बिनोद एक्का ने बताया कि शपथ पत्र विद्यार्थी से लेने का कोई प्रावधान नहीं है। न तो विश्वविद्यालय ने और न ही एनसीटीई ने कोई छात्राओं से शपथ पत्र लेने का निर्देश दिया है। पाठ्यक्रम के दौरान दो वर्ष तक गर्भवती नहीं होने का शपथ पत्र लेने का मामला प्रकाश में आया है।

विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय प्रबंधन को जांच करने को पत्र जारी किया है। प्रबंधन से मिले जांच के बाद सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। महाविद्यालय संचालन के लिए शासी निकाय है। शासी निकाय को अंधेरे में रख कर शपथ पत्र नहीं लिया जा सकता है।


यह है गर्भवती का दर्द
संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय बीएड प्रथम वर्ष की छात्रा प्रतिमा मिंज का दर्द कैमरे के साथ आंसुओं में छलक गया। प्रतिमा ने बताया कि प्रवेश के दौरान गर्भवती नहीं होने का शपथ पत्र लिया जा रहा था। गर्भवती होने की जानकारी शिक्षिका सुमन पांडेय को बताया तो उन्होंने कहा कि महाविद्यालय की फार्मेल्टी पूरी करनी होगी।

प्रतिमा ने बताया कि महाविद्यालय में विवाहित होने पर यदि प्रतिबंध है तो उसे प्रवेश नहीं दिया जाये। 10 रुपये के स्टाम्प पर शपथ-पत्र लेकर प्रवेश दे दिया गया। महाविद्यालय में सांस्कृतिक गतिविधि के नाम पर नृत्य के लिए बाध्य कर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान आठवें महीने से गर्भवती थी। इसके बाद भी नृत्य के लिए दबाव बनाया गया।

नृत्य के दौरान महिला शिक्षिकाएं हंसी उड़ा रही थीं जबकि छात्र-छात्राओं का सिर शर्म से झुक गया था। प्रतिमा ने बताया कि प्रसव के दौरान मेडिकल लीव (मातृत्व अवकाश) का पत्र दिया है। प्रसव के बाद कॉलेज लौटने पर बच्चे को फीडिंग कराने के लिए नहीं जाने दिया जाता है। कॉलेज में विद्यार्थियों के आने के बाद ताला लगा दिया जाता है।


2 वर्षीय पाठ्यक्रम में समय की बाध्यता नहीं
एक वर्षीय पाठ्यक्रम में समय की बाध्यता होती थी लेकिन दो वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम में समय की बाध्यता नहीं है। पाठ्यक्रम को तीसरे वर्ष में भी पूरा किया जा सकता है। दो वर्षीय पाठ्यक्रम के दौरान शपथ पत्र लिये जाने की कोई व्यवस्था नहीं है।
प्रो. रोहिणी प्रसाद, कुलपति, सरगुजा विश्वविद्यालय


महाविद्यालय के शासी निकाय का है शपथ-पत्र
राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद तथा सरगुजा विश्वविद्यालय का शपथ पत्र नहीं है। छात्राओं से लिया जाने वाला शपथ-पत्र महाविद्यालय के शासी निकाय का है।
डॉ. अंजन ङ्क्षसह, प्राचार्य, संत हरकेवल बीएड कॉलेज


ऐसा शपथ-पत्र नहीं आया बैठक में
पाठ्यक्रम विवरणिका बैठक में नहीं लाया गया है। पाठ्यक्रम विवरणिका में प्रकाशित शपथ पत्र जिसमें छात्राओं को गर्भवती नहीं होने को लिखा है, बैठक में प्रस्तुत नहीं किया गया है और न ही विचार किया गया है।
समन नारायण उपाध्याय, शासी निकाय में विवि प्रतिनिधि


मैंने नहीं देखा शपथ-पत्र
मैं शपथ-पत्र ही नहीं देखा हूं। बैठक में न तो कभी शपथ पत्र को शामिल किया गया और न ही इस पर विचार किया गया। बैठक के मिनट्स दिखाये जाते हैं। मिनट्स देख कर ही हस्ताक्षर किया जाता है।
जयस्तु दत्ता, शासी निकाय में विवि प्रतिनिधि

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