
अंबिकापुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रयोगशालाओं में जीवों के विच्छेदन पर प्रतिबंध लगाये जाने के बाद आभासिक मॉडल वर्तमान प्रयोग के विकल्प बन गये हैं। यह बातें शनिवार को टॉपिक ऑफ द डे के दौरान राजमोहिनी देवी शासकीय महाविद्यालय के प्राणिशात्र विभाग की अध्यक्ष प्रो. एस माहुले ने कही।
उन्होंने जीवों के विच्छेदन पर प्रतिबंध लगाये जाने के बाद प्रयोगशाला में आने वाली समस्याओं के सम्बन्ध में बताया कि वास्तविक प्रयोग और मॉडल के माध्यम से बताये जाने में अंतर होता है। मॉडल एक सीमा तक यथार्थता के करीब जा सकते हैं लेकिन वास्तविक नहीं हो सकते हैं। विद्यार्थियों को मॉडलों चित्रों से माध्यम से तथ्यों की व्याख्या करना होता है।
डॉ. माहुले ने बताया कि प्रयोशालाओं में जीवों पर प्रयोग होने से पर्यावरण पर असर पड़ा है।
कुछ जीवों के संख्या पर भी असर दिखने लगा है। उन्होंने बताया कि जीवों का प्रयोगशाला में विकल्प मॉडल ही हो सकते हैं। जीवों के वाह्य आकार, किसी विशेष अंग के आकार का मॉडल बनाया गया है। विद्यार्थियों को पुआल, रस्ती, जूट, लकड़ी, मिट्टी से मॉडल बनाने की सलाह दी जाती है। गल्र्स कॉलेज में १०० अधिक मॉडल बनाये गये हैं। प्रदेश सरकार ने मॉडलों की सफलता को लेकर पुरस्कृत भी किया है।
उन्होंने सरगुजा क्षेत्र के विद्यालयों, महाविद्यालयों को प्रयोगशाला में मॉडलों का प्रयोग करने के लिए आह्वान किया। मॉडलों के साथ विज्ञान के विद्यार्थियों को वीडियो क्लिप भी दिखाई जा सकती है जो तथ्यों से रू-ब-रू करायेगी। उन्होंने जीवों के विच्छेदन पर प्रतिबंध लगाये जाने के बाद प्रयोगशाला में आने वाली समस्याओं के सम्बन्ध में बताया कि वास्तविक प्रयोग और मॉडल के माध्यम से बताये जाने में अंतर होता है।
मॉडल एक सीमा तक यथार्थता के करीब जा सकते हैं लेकिन वास्तविक नहीं हो सकते हैं। विद्यार्थियों को मॉडलों चित्रों से माध्यम से तथ्यों की व्याख्या करना होता है। मॉडलों के साथ विज्ञान के विद्यार्थियों को वीडियो क्लिप भी दिखाई जा सकती है जो तथ्यों से रू-ब-रू करायेगी।
Published on:
17 Feb 2018 02:12 pm
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