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जुड़वा बहनों ने यूनिवर्सिटी बैडमिंटन में मनवाया अपना लोहा, जानिए, शिखर की ओर बढ़ रहीं दोनों ने क्या कहा

सीमा और रेखा पहाडिय़ा ने कीट विश्वविद्यालय भुवनेश्वर में आयोजित प्रतियोगिता में लिया हिस्सा

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Seema and Rekha Pahadiya

Twin sisters Seema and Rekha

अंबिकापुर. सरगुजा जिले के बतौली निवासी जुड़वा बहनें सीमा पहाडिय़ा व रेखा पहाडिय़ा ने अपने अदम्य साहस, परिश्रम और प्रदर्शन से बैडमिंटन में इबारतेंं लिखनी शुरु कर दी हैं। दोनों ने स्कूल शिक्षा के दौरान ही नेशनल प्रतियोगिता में शिरकत कर चुकी हैं।

वर्तमान में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय की ओर से खेलते हुए दोनों ने क्वार्टर फाइनल तक का सफर पूरा किया। यह सरगुजा के लिए बड़ी उपलब्धि है जब जुड़वा बहनें खेल के क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रही हैं।


सीमा ने प्रतियोगिता के बाद अपने खेल जीवन के रोचक संस्मरण को साझा करते हुए बताया कि कीट विश्वविद्यालय भुवनेश्वर में आयोजित प्रतियोगिता में उसे नेशनल के लिए क्वालीफाई करने की उम्मीद थी लेकिन गत वर्ष की चैम्पियन डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय की टीम से शानदार मुकाबले में प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा।

सीमा और रेखा दोनों ने बताया कि अगले वर्ष और अच्छी तैयारी के साथ प्रतियोगिता में शामिल होंगी। अंतर विश्वविद्यालय स्तरीय प्रतियोगिता में चैम्पियन बनना पहला लक्ष्य है।

शासकीय नवीन विद्यालय में सीमा पहाडिय़ा और रेखा पहाडिय़ा बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। गत वर्ष भी सरगुजा विश्वविद्यालय की ओर से प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। उस समय तैयारी अच्छी नहीं होने के कारण प्रथम चरण में बाहर होना पड़ा।


स्कूल शिक्षा के दौरान खेला नेशनल
सीमा और रेखा ने बताया कि उनकी प्रारम्भिक शिक्षा डीएव्ही मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल भटको में हुई है। स्कूल शिक्षा के दौरान ही दोनों ने बैडमिंटन को कॅरियर के रूप में चयन किया। अध्ययन के साथ खेल को भी समान समय देती हैं। विद्यालय स्तरीय प्रतियोगिता के दौरान सीमा और रेखा ने औरंगाबाद में नेशनल खेला था। क्वार्टर फाइनल में दिल्ली की टीम से हार गई थीं।


सिंगल्स और डबल्स में है शानदार जोड़ी
सीमा और रेखा दोनों सिंगल्स मुकाबले के साथ डबल्स में भाग लेती हैं। सीमा और रेखा ने बताया कि सिंगल्स मुकाबले में पूरे दमखम के साथ मैच में उतरना होता है जबकि डबल्स मुकाबले में दोनों खिलाडिय़ों के बीच तारतम्यता मायने रखती है।

सिंगल्स में बचाव व आक्रमण की जिम्मेदारी स्वयं पर होती है जबकि डबल्स मुकाबले में विरोधी को चकमा देते हुए स्थान बदल लिया जाता है। सीमा और रेखा ने बताया कि साथ होने का फायदा मिलता है। हम एक दूसरे की रणनीति और आक्रामकता के साथ मैदान पर खेलते हैं।


खेलों के लिए माता-पिता का मिलता है सहयोग
जशपुर के मूल निवासी बंधनु राम पहाडिय़ा तथा सुशीला पहाडिय़ा की जुड़वा पुत्री सीमा और रेखा बतौली के ही निवासी हो चुके हैं। सीमा और रेखा ने बताया कि खेलों के लिए पिता और परिवार का हमेशा सहयोग मिलता रहा है।


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