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महिलाओं को आर्थिक आजादी होनी चाहिए लेकिन पूछकर खर्च करने से बढ़ता है सम्मान- देखें Facebook Live

पत्रिका द्वारा 'महिलाओं को आर्थिक आजादी' के मुद्दे पर किया महिला अदालत का आयोजन, महिलाओं ने खुलकर रखी अपनी बातें

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Women court in Ambikapur

Women court

अंबिकापुर. अंबिकापुर के पुलिस लाइन स्थित सरगुजा भवन, पुलिस को-ऑर्डिनेशन सेंटर के सभाकक्ष में पत्रिका द्वारा गुरुवार को महिलाओं की आर्थिक आजादी को लेकर वूमेंस कोर्ट का आयोजन किया गया। इसमें समाज की विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं महिलाओं व युवतियों ने अपने विचार रखे। महिलाओं के विचारों का निचोड़ था महिलाओं को आर्थिक आजादी होनी चाहिए लेकिन पति, भाई या पिता से पूछकर खर्च करें तो इसमें दोनों का सम्मान बढ़ता है।

महिलाओं ने कहा कि महिला के बिना पुरुष अस्तित्व विहीन हैं। सृष्टि पर मानव जगत का आधार स्त्री ही है। नारी को सृजन की शक्ति मानकर समूचे विश्व में 8 मार्च को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं के सम्मान का है, आत्मविश्वास व स्वावलंबन का है।

आर्थिक अजादी पर महिलाओं ने खुलकर बोलते हुए कहा कि आर्थिक स्वतंत्रता एक ऐसी स्वतंत्रता है, जिसमें व्यक्ति में आत्मविश्वास व आत्मनिर्भता स्वयं ही आ जाती है और व्यक्ति अपना जीवन अपनी शर्तों पर जीने का निर्णय कर लेता है। केवल कागजी बातों तक महिलाओं का सशक्तिकरण सीमित करने से विकास नहीं होगा। महिलाओं के विकास के लिए व्यावहारिक रूप से भी काम करना होगा।

विकास का लाभ महिलाओं तक पहुंचे, तभी सशक्तिकरण का लाभ होगा। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 40 से ज्यादा महिलाएं शामिल हुईं। इनमें श्रीमती सुमन, समाज सेविका डॉ.मीरा शुक्ला, गल्र्स कालेज की प्रचार्य डॉ. ज्योति सिन्ह व पूर्व पार्षद रूबी सिद्दीकी ने जज की भूमिका निभाई। जबकि हाईकोर्ट की अधिवक्ता शिल्पा पांडेय ने एंकरिंग की।

श्रीमती सुमन ने कहा कि इंदिरा गांधी से लेकर किरण बेदी , सुनीता विलियम, कल्पना चावला ने अपने-अपने क्षेत्र में लोहा मनवाया। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि बेडिय़ां जब टूटेंगीं तो कोई भी ताकत आगे बढऩे से नहीं रोक पाएंगीं। हम सबको लडऩा है, डरना नहीं, यह हमारी जिम्मेदारी है।

वूमेंस कोर्ट में यह बात भी सामने आई कि आर्थिक आजादी का मतलब यह नहीं कि हम अपने घर-परिवार से अलग हो जाएं। ऐसी आजादी किस काम कि जब परिवार ही टूट जाए। कुछ महिलाओं ने कहा कि आर्थिक आजादी के लिए हमें खुद को सक्षम बनाना होगा।


वूमेंस कोर्ट में इन महिलाओं ने की शिरकत
वूमेंस कोर्ट में जजेस के अलावा हाईकोर्ट की अधिवक्ता शिल्पा पांडेय, रंजू अग्रवाल, करुणा जैन, डॉ.चेतना जैन, डॉ. दिप्ती पाठक, डॉ. पुष्पा सिंह, सायरा बानो, श्वेता गुप्ता, नीलिमा मिश्रा, दीपमाला सिंह, दीक्षा अग्रवाल, ममता शर्मा, अनुराधा धु्रव, मधु शर्मा, आयशा खान, सीए प्रज्ञा अग्रवाल, एकता सिरकर, डॉ. अमृता पंडा, डॉ. सृष्टि स्वर्णकार, डॉ. सुषमा केरकेट्टा, साक्षी जिंदल,

गल्र्स कॉलेज से डॉ. सुषमा भगत, सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय से डॉ. आराधना आयंगर, दीपशिखा सिन्हा, डॉ. मीना पटेल, साईं कॉलेज से डॉ. अलका पांडेय, डॉ. किरण श्रीवास्तव व नीतू सिंह सहित अन्य शामिल हुईं।

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