
Rajeev Gandhi
वाशिंगटन। अमरीका की खुफिया एजेंसी सीआईए ने पूर्व पीएम राजीव गांधी को प्रधानमंत्री पद के योग्य नहीं माना था। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या से दो साल पहले भारत के राजनीतिक भविष्य की स्थिति पर एक गोपनीय रिपोर्ट बनाई थी। इस रिपोर्ट में एजेंसी ने राजीव गांधी को राजनीतिक तौर पर अपरिपक्व करार दिया था। सीआईए ने ‘1980 के दशक के मध्य में भारत: लक्ष्य और चुनौतियां’ नाम से 14 जनवरी, 1983 को 30 पृष्ठों की एक रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की असामयिक मौत होने पर कांग्रेस के कमजोर होने की बात कही गई थी।
जनता में जोश भरने में असफल रहेंगे राजीव
इस रिपोर्ट को सूचना की स्वतंत्रता का अधिकार कानून के तहत सार्वजनिक किया गया है। इसमें कहा गया है कि राजनीतिक अपरिपक्वता के चलते इंदिरा गांधी के बेटे राजीव गांधी कांग्रेस पार्टी और देश की जनता में जोश भरने में असफल रहेंगे। हालांकि अक्टूबर, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी ही उनके उत्तराधिकारी बने और देश की कमान भी संभाली।
गलत था सीआईए का आकलन, राजीव को मिला प्रचंड बहुमत
इंदिरा गांधी की हत्या के कुछ महीनों बाद हुए आम चुनाव में राजीव के नेतृत्व में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत भी मिला था। अमरीकी खुफिया एजेंसी ने 1985 के आम चुनाव में कांग्रेस को पहले से कम सीटें मिलने की उम्मीद जताई थी। इस संबंध में रिपोर्ट में कहा गया था, इंदिरा गांधी की अचानक मृत्यु होने की स्थिति में संभावित उत्तराधिकारी के चयन में राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के साथ राजीव गांधी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। खुद राजीव गांधी के पीएम बनने की स्थिति में सत्ता पर उनकी पकड़ बहुत ही कम समय के लिए होगी। सीआईए ने तत्कालीन रक्षा मंत्री आर वेंकटरमन, विदेश मंत्री पीवी नरसिम्हा राव, वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और उद्योग मंत्री नारायण दत्त तिवारी को संभावित उम्मीदवार बताया था।
Published on:
10 Aug 2017 03:06 pm
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