अगार मालवा

एमपी के इस गांव में टूटी जात-पात की दीवारें, इस भाईचारे की हो रही हर जगह तारीफ

Caste-Creed Barriers Crumbled : एक साथ उठी दो अर्थियां, गांव ने सामाजिक समरसता का संदेश दिया। आगर विधायक मधु गेहलोत से लेकर पूरे गांव में इस भाईचारे की हो रही सराहना।
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Caste-Creed Barriers Crumbled
इस अंतिम यात्रा की हर ओर तारीफ (फोटो सोर्स: Patrika)

आगर-मालवा से दुर्गेश शर्मा की रिपोर्ट

Agar Malwa News : मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम फतेहपुर मेंढकी में एक दिन पहले एक साथ निकली दो अंतिम यात्राओं की तस्वीर अब सामाजिक समरसता की मिसाल बन गई हैं। यहां ब्राह्मण समाज के 67 वर्षीय सत्यनारायण शर्मा और अनुसूचित जाति वर्ग के 65 वर्षीय नारायण मालवीय के निधन के बाद ग्रामीणों ने दोनों की अंतिम यात्रा एक साथ निकालकर जात-पात से ऊपर उठकर इंसानियत और भाईचारे का संदेश दिया था। वहीं, आगर विधायक मधु गेहलोत ने भी दुख की इस घड़ी में सामने आए इस भाईचारे की सराहना की है।

अब मंगलवार को इस पहल की गांव ही नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी खासा चर्चा हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि, दोनों परिवारों के दुख की घड़ी में पूरा गांव उनके साथ खड़ा हुआ है। यही कारण है कि, दोनों की अर्थियां एक साथ उठीं और माकड़ौन से बुलाए गए बैंड - बाजे के साथ अंतिम यात्रा गांव की गलियों से होकर निकली। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। इस दौरान जाति और समाज का भेद कहीं नजर नहीं आया। दोनों परिवारों के लोग एक-दूसरे के दुख में सहभागी बने और ग्रामीणों ने भी इसे पूरे गांव का दुख मानकर अंतिम विदाई दी।

दुख ने मिटाईं जाति की दूरियां

फतेहपुर मेंढकी में सामने आई ये तस्वीर इसलिए भी खास बन गई, क्योंकि अंतिम विदाई के दौरान सामाजिक पहचान पीछे छूट गई और इंसानियत का रिश्ता सबसे ऊपर दिखाई दिया। ग्रामीणों की इस पहल ने यह संदेश दिया कि दुख और संवेदना किसी जाति या वर्ग की सीमा में बंधे नहीं होते।

'सिर्फ दो परिवारों का नहीं, पूरे गांव का दुख'

ग्राम फतेहपुर मेंढकी के एक ग्रामीण लक्ष्मी नारायण का कहना है कि, गांव में आपसी भाईचारा हमेशा से रहा है। दोनों परिवारों के दुख को पूरे गांव ने अपना दुख माना और इसी भावना के साथ दोनों की अंतिम यात्रा एक साथ निकाली गई।

'पहल बेहद खास है'

वहीं, भाजपा जिलाध्यक्ष ओम मालवीय ने भी ग्रामीणों की इस पहल को सकारात्मक बताया है। उन्होंने कहा कि, समाज में आपसी सद्भाव और भाईचारा बनाए रखने के लिए ऐसी पहल बहुत खास है।

सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर हो रही सराहना

दोनों अंतिम यात्राओं की तस्वीर और ग्रामीणों की पहल की अब सामाजिक एवं राजनीतिक स्तर पर भी सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि आज जब समाज में जाति और वर्ग को लेकर दूरियां दिखाई देती हैं, ऐसे समय में फतेहपुर मेंढकी के ग्रामीणों ने व्यवहार से यह साबित किया कि इंसानियत सबसे बड़ा रिश्ता है। गांव की गलियों से एक साथ निकली दोनों अर्थियां सिर्फ दो परिवारों की अंतिम यात्रा नहीं थीं, बल्कि सामाजिक एकता, सद्भाव और भाईचारे का संदेश भी दे रही थीं। ग्रामीणों की यह पहल समाज को यह सीख देती है कि जाति की पहचान से ऊपर इंसानियत की पहचान होती है और मुश्किल वक्त में एक-दूसरे के साथ खड़ा होना ही सामाजिक समरसता की असली तस्वीर है।

Updated on:
13 Oct 2026 03:38 pm
Published on:
13 Oct 2026 03:35 pm