Agra Crime News: आगरा में साइबर ठगों के गिरोह ने आधार कार्ड की फोटो और पता एडिट कर 250 से ज्यादा लोगों के नाम पर 2.5 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी लोन कराया।
Cyber Crime News Agra: आगरा में साइबर ठगों का एक खतरनाक गिरोह लोगों के आधार कार्ड की फोटो और पता एडिट कर बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से लोन करा रहा था। इस गिरोह ने बीते पांच वर्षों में 250 से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाया और 2.5 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी को अंजाम दिया। पुलिस ने इस गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का बड़ा खुलासा किया है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब शास्त्रीपुरम निवासी शैलेंद्र ने साइबर क्राइम थाना में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि बजाज फाइनेंस से किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके नाम पर एक आईफोन और दो अन्य मोबाइल फोन फाइनेंस करा लिए हैं। कंपनी की ओर से जब उनसे किस्तों की मांग की गई तो उन्हें इस फर्जीवाड़े का पता चला। जांच में सामने आया कि उनके आधार कार्ड को एडिट कर उसमें किसी और की फोटो और नया पता जोड़ दिया गया था, जिसके आधार पर फाइनेंस कराया गया।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी ने पीड़ित के सिबिल रिकॉर्ड में तीन नई फर्जी ईमेल आईडी जोड़ दी थीं, ताकि बैंक और फाइनेंस कंपनियों से आने वाले नोटिफिकेशन असली पीड़ित तक न पहुंच सकें। ठग आधार कार्ड की डिजिटल कॉपी में बदलाव कर पूरी तरह नई पहचान तैयार करते थे और उसी पहचान के जरिए मोबाइल, गैजेट और अन्य चीजों पर लोन ले लेते थे।
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने जांच के बाद नारायण उर्फ नितिन चौरसिया निवासी न्यू आदर्श नगर बल्केश्वर को गिरफ्तार किया। आरोपी वर्तमान में गढ़ी भदौरिया के चाणक्यपुरी इलाके में रह रहा था। पुलिस ने उसके पास से एक मोबाइल फोन, फर्जी आधार कार्ड और नकद रुपये बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबे समय से ठगी कर रहा था और हर बार ठिकाना बदलकर पुलिस की नजरों से बच जाता था।
पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि वह दिल्ली निवासी सन्नी उर्फ प्रमोद और संजेश समेत अन्य साथियों के साथ मिलकर इस ठगी के नेटवर्क को चला रहा था। गिरोह के सदस्य अलग-अलग नामों से लोन लेते थे, जिनमें नारायण, नितिन, मनोज और शैलेन्द्र जैसे नामों का इस्तेमाल किया गया। आरोपी ने बताया कि वह जिस मकान में किराए पर रहता था, वहां के पते पर केवाईसी कराकर लोन ले लेता था और मकान मालिक को भी एडिट किया हुआ आधार कार्ड दिखाकर फर्जी नाम बताता था।
गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिराना थी। लोन मिलने के बाद वे कुछ समय तक वहीं रहते थे और जैसे ही बैंक की रिकवरी टीम आने की संभावना बनती, वे तुरंत ठिकाना बदल लेते थे। इस तरह असली पीड़ितों के नाम पर लोन चलता रहता और उन्हें फाइनेंस कंपनियों से रिकवरी कॉल और नोटिस मिलते रहते थे। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी कर रही है।
साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपने आधार कार्ड की फोटो या डिजिटल कॉपी किसी अनजान व्यक्ति को न दें। साथ ही समय-समय पर अपना सिबिल स्कोर और बैंक से जुड़े दस्तावेज जांचते रहें। यदि किसी को अपने नाम पर फर्जी लोन या फाइनेंस का शक हो तो तुरंत साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराएं।