आगरा

आजादी की क्रांति ऐसी कि रेलवे स्टेशन को कर दिया था आग के हवाले

अंग्रेजों के कब्जे के गोदाम पर कब्जा कर ग्रामीणों में बांट दिया था राशन

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Aug 09, 2018
August Kranti
आजादी की क्रांति ऐसी कि रेलवे स्टेशन को कर दिया था आग के हवाले

आगरा। अगस्त क्रांति में अंग्रेजी हकूमत को नाकों चने चबाने को मजबूर कर दिया था। 24 अगस्त 1942 को जांबाज योद्धाओं ने करो या मरो आंदोलन में जो किया, उससे अंग्रेज हक्के बक्के रह गए थे। आगरा के निकट बना बरहन का रेलवे स्टेशन आग की भेंट चढ़ गया था। यहां क्रांति की ऐसी ज्वाला फूटी कि देखते ही देखते स्टेशन आग के हवाले हो गया। अंग्रेज थरथरान गए।

दूरसंचार ना हो सके इसलिए काट दिए थे तार
इतिहासों में आगरा का बरहन स्टेशन अपना नाम दर्ज करा चुका है। स्टेशन पर आग की घटना ने अंग्रेजों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। सबसे पहले संचार के साधनों को खत्म किया गया। दूरसंचार की व्यवस्था के उपलब्ध टेलीफोन के तारों को काट दियाग या। आजादी के दीवाने भारत माता की जय जयकार करते हुए पूरे गांव और कस्बे में घूम रहे थे। अंग्रेजों को खदेड़ने के लिए उन्होंने कई सरकारी गोदामों पर कब्जा कर लिया। अंग्रेजों की फौज के आने से पहले बीज गोदाम पर रखीं हजारों बोरियों को ग्रामीणों में बांट दिया गया। अंग्रेज फौज ने यहां पहुंचकर गोली चलाना शुरू कर दिया, जिसमें बैनई गांव के वीर केवल सिंह शहीद हुए। वहीं कई अन्य आंदोलननकारी घायल हो गए। आज भी बरहन में आजादी के लिए युवाओं को मिसाले दी जाती है।

जल उठा था भारत, गोरों को भगाने में जुटे थे वीर सपूत
बताया गया है कि बरहन के स्टेशन को जलाने की जब खबर मिली तो इस घटना के बाद कई अन्य स्थानों पर क्रांतिकारी वीर सपूतों ने अपने जौहर दिखाए। मालगाड़ी के डिब्बे को मिढ़ाकुर के पास आग के हवाले कर दिया। क्रांतिकारी, श्याम बाबू, रामप्रसाद, तेज सिंह आदि के हौसले ने इस घटना को अंजाम दिया। इसके लिए तेज सिंह को सात वर्ष की जेल भी हुई थी।

Published on:
09 Aug 2018 07:41 pm