आगरा

यूपी में एक और दरगाह-मंदिर विवाद का जन्म, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के खिलाफ सिविल कोर्ट में याचिका दायर

Kamakhya Temple in Agra: उत्तर प्रदेश में एक और दरगाह-मंदिर विवाद का जन्म हो गया है। आगरा निवासी अधिवक्ता ने अजय प्रताप सिंह ने सिविल न्यायालय सीनियर डिवीजन में नया दावा दायर किया है। कोर्ट ने इसका संज्ञान लेकर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
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May 10, 2024
Sheikh Salim Chishti Dargah Agra

Sheikh Salim Chishti Dargah Agra: यूपी में काशी के ज्ञानवापी और मथुरा में श्रीकृष्‍ण जन्मभूमि विवाद के बाद एक और दरगाह-मंदिर विवाद शुरू हो गया है। आगरा के अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने सिविल न्यायालय सीनियर डिवीजन में नया दावा पेश किया है। इसके अनुसार आगरा के फतेहपुर सीकरी में स्थित सलीम चिश्ती की दरगाह को कामाख्या माता का मंदिर और जामा मस्जिद को कामाख्या माता मंदिर परिसर बताया गया है। केस को न्यायाधीश मृत्युंजय श्रीवास्तव के लघुवाद न्यायालय में पेश किया गया। जिस पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए नोटिस इश्यू का आदेश दिया। साथ ही सुनवाई की अगली तिथि ऑनलाइन ई-कोर्ट पर देखने को कहा है।

आगरा में अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने कोर्ट में पेश किया ये दावा

अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया "फतेहपुर सीकरी की विवादित संपत्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन एक संरक्षित स्मारक है। इसपर सभी विपक्षीगणों ने अतिक्रमण किया है। फतेहपुर सीकरी का मूल नाम सीकरी है। इसे विजयपुर सीकरी भी कहा जाता था। ये सिकरवार क्षत्रियों का राज्य था।" अधिवक्ता ने आगे बताया "विवादित संपत्ति माता कामाख्या देवी का मूल गर्भ गृह व मंदिर परिसर था।"

अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने आगे बताया "यहां की प्रचलित ऐतिहासिक कहानी के अनुसार फतेहपुर सीकरी को अकबर ने बसाया जो झूठ है। बाबर ने अपने बाबरनामा में सीकरी का उल्लेख किया था और वर्तमान में बुलंद दरवाजे के नीचे दक्षिण पश्चिम में एक अष्टभुजीय कुआं/बाओली है और दक्षिण पूर्वी हिस्से में एक गरीब घर है, जिसके निर्माण का वर्णन बाबर ने किया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अभिलेख भी यही मानते हैं।"

ASI की खुदाई में सरस्वती के प्रतिमा के साथ जैन धर्म की मूर्तियां मिलीं

अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि डीबी शर्मा जोकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीक्षण पुरातत्वविद रहे हैं उन्होंने अपने कार्यकाल में फतेहपुर सीकरी के बीर छबीली टीले की खुदाई की, जिसमें उन्हें सरस्वती और जैन मूर्तियों मिलीं, जिनका काल 1000 ईस्वी के लगभग था। डीबी शर्मा ने अपनी पुस्तक "आर्कियोलॉजी ऑफ फतेहपुर सीकरी- न्यू डिस्कवरीज़" में इसका विस्तार से वर्णन किया है। इसी पुस्तक के पेज संख्या 86 पर वाद संपत्ति का निर्माण हिन्दू व जैन मंदिर के अवशेषों से बताया है। वहीं अंग्रेज अधिकारी ईबी हावेल ने वाद संपत्ति के खंभों व छत को हिन्दू शिल्पकला का बताया है और मस्जिद होने से इनकार किया है।

अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि खानवा युद्ध के समय सीकरी के राजा राव धामदेव थे। खानवा युद्ध में जब राणा सांगा घायल हो गए तो राव धामदेव धर्म बचाने के लिए माता कामाख्या के प्राण प्रतिष्ठित विग्रह को ऊंट पर रखकर पूर्व दिशा की ओर गए और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के सकराडीह में कामाख्या माता के मंदिर को बनाकर इस विग्रह को पुनः स्थापित किया। उस तथ्य का उल्लेख राव धामदेव के राजकवि विद्याधर ने अपनी पुस्तक में किया है।

इन्हें बनाया गया वादी और प्रतिवादी

अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि भारतीय कानून भी यही कहता है कि किसी भी मंदिर की प्रकृति को बदला नहीं जा सकता है। यदि एक बार वो मंदिर के रूप में प्राण प्रतिष्ठित हो गया तो वह हमेशा मंदिर ही रहेगा। सुनवाई के दौरान वादी व अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ, अधिवक्ता अभिनव कुलश्रेष्ठ व अजय सिकरवार उपस्थित रहे।

अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि केस में माता कामाख्या, आस्थान माता कामाख्या, आर्य संस्कृति संरक्षण ट्रस्ट, योगेश्वर श्रीकृष्ण सांस्कृतिक अनुसंधान संस्थान ट्रस्ट, क्षत्रिय शक्तिपीठ विकास ट्रस्ट और अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह वादी हैं। जबकि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, प्रबंधन कमेटी दरगाह सलीम चिश्ती, प्रबंधन कमेटी जामा मस्जिद को प्रतिवादी बनाया गया है।

Updated on:
10 May 2024 05:31 pm
Published on:
10 May 2024 05:31 pm