‘आगरा बियॉन्ड ताज’ का आठवाँ संस्करण ग्रैंड होटल में आयोजित किया।
आगरा। स्फीहा (सोसाइटी फॉर प्रिजर्वेशन ऑफ़ हेल्थी एनवायरनमेंट एंड इकोलॉजी एंड हेरिटेज ऑफ़ आगरा) ने उ.प्र. टूरिज्म और टूरिज्म गिल्ड ऑफ़ आगरा के सहयोग से, ताज महोत्सव पर्व के साथ, अपना वार्षिक कार्यक्रम ‘आगरा बियॉन्ड ताज’ का आठवाँ संस्करण ग्रैंड होटल में आयोजित किया। ‘आगरा बियॉन्ड ताज’ के आठवें संस्करण का विषय 'आगरा की आध्यात्मिक विरासत' था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कमांडर एनसीसी आगरा ब्रिगेडियर संजय सांगवान थे।
स्वागत के साथ हुई शुरुआत
कार्यक्रम के शुरुआत में स्फीहा के राजीव नारायण ने, जो कि इस कार्यक्रम के आयोजन सचिव भी है, सबका स्वागत किया। स्फीहा के अध्यक्ष एमए पठान ने बताया की कैसे स्फीहा सन 2010 से लगातार ‘आगरा बियॉन्ड ताज' का आयोजन करता आ रहा है और इस आठवें संसकरण में अध्यात्म और आगरा से जुड़े कई पहलु जिनकी आमतौर पर लोगों को जानकारी नहीं है, उजागर होंगे - इसकी कामना करते हैं।
धर्म पर हुई चर्चा
चार वक्ताओं ने आज बौद्ध धर्म, जैन धर्म, सिख धर्म और संत मत - राधास्वमी मत पर चर्चा की। सुशील सरित ने बौद्ध धर्म के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि लगभग 2500 वर्ष पूर्व उदित बौद्ध धर्म का मूल आधार है। मध्य मार्ग का अनुसरन, हिन्दू धर्म में उत्पन्न रूढ़ियों से विद्रोह और अष्टांग मार्ग के अनुसरन द्वारा मोक्ष की प्राप्ति है। सम्राट अशोक द्वारा इसे विश्व स्तर पर प्रचारित किया गया। कनिष्क ने इसे पूर्ण प्रश्रय दिया।I हीनयान, महायान एवं वज्रयान इसके प्रमुख सम्प्रदाय हैं। शांति का संदेश देने वाले इस धर्म को 8 देशों ने अपना राष्ट्र धर्म स्वीकार किया है। आज अनुयायियों की दृस्टि से ये विश्व का चौथा सबसे बड़ा धर्म है। आगरा का बुढ़िया का ताल, निकट मैनपुरी का बिधूना एवं फरुखाबाद के निकट संकिसा महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल हैं ।
जैन धर्म के बारे में दी जानकारी
मनोज कुमार जैन जो कि भारतीय जैन संग़ठन के प्रदेश अध्यक्ष हैं, उन्होंने जैन धर्म का परिचय देते हुए बताया कि अहिंसा, अनेकांत, अपरिग्रह जैन धर्म की विशेष पहचान है। उन्होंने यह भी बताया कि आगरा का प्रत्यक्ष नाता जैन धर्म से भगवान श्री कृष्ण के काल से है। जैन धर्म में 24 तीर्थंकर माने गये हैं, जिसमें 22 वें तीर्थंकर अरिष्टनेमी अथवा नेमीनाथ स्वामी हैं। ये श्री क्रष्ण के चचेरे भाई थे, इनके पिता का नाम राजा समुंद्रविजय था, वे शौर्यसेन नगरी के राजा थे। यह शौर्यसेन आज शौरीपुर के नाम से प्रसिद्ध है, जो कि आगरा से मात्र 72 किलोमीटर दूर बाहर तहसील के बटेश्वर पर स्थित है, जहां आज भी बहुत सुन्दर जैन मन्दिर हैं व इसी स्थान को 22 वें तीर्थंकर नेमीनाथ स्वामी की जन्म स्थली के रूप में विश्व भर के जैन धर्मांम्बली व शोधकर्ता बङी संख्या में आते हैं। I