सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है ये मदरसा मुस्लिम बच्चे पढ़ते हैं गीता हिंदू कुरान
आगरा। मदरसे में शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए सरकारों ने कई सारे नए नियम लागू किए हैं। बच्चों को मदरसों में अच्छी शिक्षा मिल सके। पिछले कई दिनों से ताजमहल पर नमाज और शिवचालीसा पढ़ने की विरोधाभासी बयान कई राजनीतिक पार्टियां देती रहीं। लेकिन, आगरा में राजनीत में पंडितों को करारा जवाब दे रहा है यहां का एक मदरसा, जिसमें दोनों संप्रदायों के बच्चे उर्दू के साथ साथ संस्कृत की तालीम ले रहे हैं। यहां संस्कृत और उर्दू की पढ़ाई बच्चों को कई सालों से कराई जा रही है।
शाहगंज के दौरेठा में पढ़ते हैं चार सौ बच्चे
आगरा के शाहगंज क्षैत्र के दौरेठा में ये मदरसा संचालित है। जिसका नाम मदरसा मोईन उल इस्लाम है। इस मदरसे में लगभग चार सौ बच्चे पढ़ते हैं, जिनमें लगभग पौने दो सौ बच्चे गैर मुस्लिम है। लेकिन इस मदरसे में पढ़ने वाले सभी बच्चे एक साथ एक क्लास में हिंदी उर्दू इंग्लिश और संस्कृत पढ़़ते हैं। इस मदरसे में बच्चों को गीता के श्लोक और क़ुरान की आयतें भी पढ़ाई जाती है। मदसरे के संचालक मौलाना उज़ैर आलम का कहना है कि जिस तरह का आज माहौल हिन्दू और मुस्लिमों के बीच नफ़रत का ज़हर घोलने का पैदा किया जा रहा है, उस ज़हर को मिटाने के लिए छोटे छोटे बच्चों को बुनियादी तालीम और दीन धर्म के बारे में सही जानकारी देना जरूरी है। जिससे एक दूसरे में मोहब्ब्त कायम हो और हमारे देश के ये बच्चे दुनिया में देश का नाम रोशन करें। मौलाना उज़ैर आलम मदरसा कहते हैं कि इस मदरसे में पढ़ने वाले सभी बच्चे भी मदरसे के माहौल से बहुत खुश हैं। बच्चों को एक साथ दोनों धर्मों की जानकारी दी जाती है, उन्हें दोनों धर्मो की किताबों को बारीकी से पढ़ाया जाता है।
देश के भविष्य को ज़हरीली फिजाओं में मिठास घोलने के लिए तैयार किया जा रहा
छात्रा नूर वानो और शालिनी कुमारी और पढ़ाई करने वाले सलमान का कहना है कि हिन्दू मुस्लिमों को आपस में लड़ाकर राजनेता राजनीतिक रोटियां सेकते हैं। मदरसा मोईन उल इस्लाम में देश के भविष्य को ज़हरीली फिजाओं में मिठास घोलने के लिए तैयार किया जा रहा है।