आगरा

नो मतलब नो, चिकित्सक चला रहे ऐसी मुहिम जो देगी लोगों को जीवन

ताजनगरी से शुरू हुई है नो मतलब नो, तंबाकू को ना कहने की मुहिम

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May 11, 2018
doctor alok mittal

आगरा। सिगरेट, गुटखा, तंबाकू और बीड़ी का सेवन करने से 40 से 45 साल की उम्र में बुढ़ापा आ जाता है। इसके साथ ही कैंसर का खतरा रहता है। इसलिए आज से ही अपने पापा, चाचा, भाई और रिश्तेदारों से तंबाकू छोड़ने के लिए कहें। जी हां ये कहना है आगरा के एक चिकित्सक का, जिन्होंने आगरा शहर में ऐसी मुहिम छेड़ रखी है, जिसमें रोजाना सैकड़ों लोग शामिल हो रहे हैं। ये हैं डॉ. आलोक मित्तल, जो नो मतलब नो कैंपेन के संयोजक है। अपने काम के साथ साथ तंबाकू छुड़ाने के लिए ये रोजाना सुबह सुबह निकलते हैं और लोगों को तंबाकू छोड़ने के लिए जागरूक करते हैं।

1500 से अधिक लोग धीमे जहर को छोड़ चुके

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डॉ. आलोक मित्तल का कहना है कि आगरा में सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू और गुटखा छोड़ने के लिए शुरू हुई मुहिम में 1500 से अधिक लोग धीमे जहर को छोड़ चुके हैं। नो मतलब नो टीम 20,000 लोगों से सीधे संपर्क कर चुकी है। ये सभी मुहिम के साथ जुड़कर तंबाकू का सेवन ना करने और ना करने देने के काम में जुटे हैं। अभियान का अंतिम पड़ाव नजदीक आ रहा है। 31 मई को तंबाकू निषेध दिवस पर एक साथ शहर में एक लाख लोग एक साथ सौ वार्ड, सौ पॉर्क और अलग स्थानों पर तंबाकू का सेवन ना करने और ना करने देने का संकल्प लेंगे।

45 साल की उम्र के बाद काम करने की क्षमता कम

डॉ.आलोक मित्तल जब स्कूल, फैक्ट्री या संस्थान में पहुंचते हैं तो लोगों को बताते हें कि डॉक्टर और इंजीनियर बनकर जो काम करना चाहते हैं वह आज से ही कर सकते हैं। आपको अपने रिश्तेदार और जान पहचान वालों से तंबाकू छोड़ने का संकल्प दिलवाया है, उन्हें बार बार कहना है कि तंबाकू का सेवन ना करें, इसमें 10 से 15 दिन लगेंगे और वे तंबाकू का सेवन करना छोड देंगे। डॉ सुनील बंसल ने कहा कि तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी और गुटखा का सेवन करने वालों को बुढ़ापा जल्दी आ जाता है, बाल सफेद हो जाते हैं, 45 साल की उम्र के बाद काम करने की क्षमता कम होने लगती है। एक बच्चा पांच लोगों की तंबाकू छुड़वाने का प्रयास करे। इस अभियान के तहत 31 मई को आगरा में एक साथ एक लाख लोग तंबाकू का सेवन ना करने और ना करने देने का संकल्प लेंगे।

चिकित्सक पत्नी भी रहती हैं साथ
डॉ.आलोक मित्तल की चिकित्सक पत्नी और आगरा की कैंसर विशेषज्ञ डॉ. सुरभि गुप्ता कहती है कि तम्बाकू के सेवन से कैंसर होने के साथ जीवनशैली भी बिगड़ जाती है। लोगों के बीच जाने में शर्मिंदगी होती है, तो इसे छोड़ देने में ही भलाई है। हम बार बार कहेंगे तो तम्बाकू छोड़नी ही पड़ेगी। कोशिश हमेशा कामयाब होती है, इसकी शुरुआत अपने परिवार से करनी है और एक व्यक्ति से तम्बाकू छुड़वानी है।

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Published on:
11 May 2018 07:48 am
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