सितम्बर 2013 की दरों पर फिर पहुंचा पेट्रोल और डीजल का रेट, सोमवार को भारत बंद, आगरा में व्यापक तैयारियां।
आगरा। वर्ष 2013 को याद करते हैं। सितम्बर, 2013 में पेट्रोल और डीजल के दाम इस कदर बढ़ गए थे कि लोगों ने 2014 में केन्द्र सरकार का तख्ता पलट दिया था। सितम्बर, 2018 में वही स्थिति है। पेट्रोल-डीजल के मूल्य में वृद्धि होती है तो इसका चौतरफा असर होता है। माल ढुलाई की दर बढ़ने से महंगाई बढ़ती है। इन्हीं सब मुद्दों को लेकर गैर भाजपा दल सोमवार को भारत बंद करने जा रहे हैं। इसके लिए कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक रखी है।
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दरों की तुलना
एक सितम्बर, 2013 को आगरा में पेट्रोल 80.86 रुपये प्रति लीटर था। 14 सितम्बर को 82.02 रुपये प्रति लीटर हो गया था। इतिहास में यह अधिकतम रेट के रूप में दर्ज है। सितम्बर, 2018 में पेट्रोल 80.20 रुपये औऱ डीजल 72.46 रुपये प्रति लीटर हो गया है। 2019 में फिर से चुनाव होने हैं। अभी सितम्बर 2013 की दर तक नहीं पहुंचा है, लेकिन आसपास तो है ही।
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क्या चाहते हैं ट्रांसपोर्टर
महानगर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के महामंत्री मुकेश कुमार गर्ग का कहना है कि माल ढुलाई करने वालों के सामने मुश्किल है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं तो समस्या खड़ी हो जाती है। माला भाड़ा दरों को लेकर रोजाना चिक-चिक करनी पड़ती है। सरकार को महंगाई पर काबू रखना है तो पेट्रोल-डीजल के नाम कम करने चाहिए।
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कांग्रेस की तैयारी
इस बीच कांग्रेस महंगाई के मुद्दे को लेकर भारत बंद करने जा रही है। आगरा में इसकी जोरदार तैयारी चल रही है। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी नसीब सिंह रविवार को आगरा आ रहे हैं। वे भारत बंद की तैयारियों का जायजा लेंगे। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष दुष्तयंत शर्मा का कहना है कि जनता मोदी सरकार से त्रस्त आ चुकी है। कांग्रेस शासन में जब पेट्रोलियम पदार्थों पर 10 पैसे बढ़ते थे तो भाजपाई सड़कों पर आ जाते थे। अब पेट्रोल 80 रुपये और डीजल 72 रुपये के पार हो गया है, लेकिन भाजपाइयों ने अपने मुंह पर अलीगढ़ी ताला लगा लिया है। भारत बंद के लिए लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं। व्यापारियों के साथ-साथ आम जनता का भारी समर्थन मिल रहा है।
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