समाजसेवी संस्था लीडर्स आगरा की ओर से संयुक्त परिवार की संस्कृति को जीवित बनाए रखने का प्रयास
आगरा। संयुक्त परिवार संस्कारों, त्याग, तपस्या और अपनेपन की पाठशाला होते हैं, लेकिन पिछले कुछ दशकों से संयुक्त परिवारों का महत्व खत्म होने लगा है। लेकिन शहर के प्रबुद्धजीवी आज भी संयुक्त परिवार को बेहतर करार देते हैं। इनका मानना है कि संयुक्त परिवार में एक साथ रहने का जो आनंद है उसे शब्दों में वर्णित कर पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। संयुक्त परिवार की कहानी कुछ अलग ही होती है। एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ रहने से रिश्ते मजबूत बने रहते हैं और जीवन आसान बनता है।
क्या कहा कैबिनेट मंत्री ने
समाजसेवी संस्था लीडर्स आगरा की ओर से रविवार को मदिया कटरा स्थित होटल वैभव पैलेस में संयुक्त परिवार-वर्तमान परिवेश में परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें बतौर मुख्य अतिथि केबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि एक राजनैतिक व्यक्ति होने के नाते मैं हर रोज जनसमस्याएं सुनता हूं, इसमें नाली, खरंजा, बिजली, पानी से इतर तमाम मामले पारिवारिक विवादों के भी देखता हूं और मेरा व्यक्तिगत अनुभव कहता है कि जो इन विवादों में बंट जाते हैं वह बहुत खराब हालत में पहुंच जाते हैं। उन्होंने कहा कि क्योंकि छप्पर तभी उठता है, जब सभी लोग उसे मिलकर उठाते हैं। यही संयुक्त परिवार की महत्ता है। कैबिनेट मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि समाज कहां जा रहा है यह एक राजनैतिक व्यक्ति अच्छी तरह समझ सकता है, क्योंकि वह आए दिन ऐसे मामलों को सुलझाने के प्रयासों में लगा रहता है।
संयुक्त परिवार का महत्व
मुख्य वक्ता के रूप में आरएसएस के ब्रज प्रांत संपर्क प्रमुख अशोक कुलश्रेष्ठ ने कहा कि एक परिवार में जब सभी परिवार के सदस्य, दूसरी पीढी के साथ मिलजुलकर रहते हैं जैसे कि दादाजी, दादी मां, माता-पिता, चाचा-चाची और उनके बच्चे तब हम इसे एक संयुक्त परिवार कहते हैं। अति प्राचीन काल से भारतीयों द्वारा संयुक्त परिवार के महत्व को माना जाता है। लेकिन आज युवा अपनी जीवनशैली से आगे बढ़ रहे हैं। वे अपने माता-पिता और दादा-दादी के साथ मिलकर जीवन बिताने में शर्म महसूस करते हैं। ऐसे लोगों को आम तौर पर बडों के मार्गदर्शन उनके द्वारा दी गई देखभाल और उनके साथ बिताए खुशियों के पल हमेशा याद आते हैं, जो भविष्य में अकेलापन, कुंठा आदि बहुत सारी समस्याओं का कारण बनती है।
संयुक्त परिवारों का यह विघटन जीवन को मुश्किल बना रहा
विशिष्ट वक्ता समाजसेवी बबिता चौहान ने कहा कि बिखरते संयुक्त परिवार के बीच टूटती संस्कारों की डोर आज अनेक समस्याएं पैदा कर रही है। यह माता-पिता को बच्चों से, बच्चों को माता-पिता से भाई को भाई से अलग कर रही है। उन्होंने कहा कि हमें समझना होगा कि संयुक्त परिवारों का यह विघटन जीवन को मुश्किल बना रहा है। हम अपने बुजुर्गों से सीख नहीं पाते, उनके अनुभवों का लाभ नहीं ले पाते।
कठिनाइयां बढ़ रही
विशिष्ट अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम भदौरिया ने कहा कि भारतीय सामाजिक व्यवस्था में संयुक्त परिवार का खास स्थान रहा है। लेकिन बदलते परिवेश में एकल परिवार की अवधारणा मजबूत हो रही है। इससे जीवन की कठिनाइयां बढ़ रही हैं।
इस भारतीय संस्कृति को जीवित रखना है
लीडर्स आगरा के अध्यक्ष डा. पार्थ सारथी शर्मा ने कहा कि इन दिनों ज्यादातर लोग जॉब और अन्य कामों के सिलसिले में अपने परिवार से दूर रहते हैं। कई बार जमीन-जायदाद या परिवार का कोई और विवाद भी अलग-अलग होने की वजह बन जाता है। यही कारण है कि एकल परिवारों की तादाद तेजी से बढ़ रही है, जबकि संयुक्त परिवारों का विघटन हो रहा है। ऐसे में इस आयोजन के पीछे लीडर्स आगरा का मुख्य उद्देश्य और सोच संयुक्त परिवारों का महत्व लोगों को समझाकर इस भारतीय संस्कृति को जीवित रखना है। सर्राफ कमेटी के महामंत्री राकेश मोहन ने कहा कि अगर भारतीय संस्क्रति को बचाना है तो संयुक्त परिवारों के आधार को फिर मजबूत करना होगा।
गली-मोहल्ला स्तर पर हो परिवारों को बांधने का प्रयास
लीडर्स आगरा के महामंत्री सुनील जैन ने कहा कि संस्था द्वारा आयोजित की जा रही परिचर्चाओं का आज यह बेहद खास विषय था। वक्ताओं और अतिथिगणों की ओर से आए सुझाव पर संस्था द्वारा अब यह प्रयास किया जाएगा कि संयुक्त परिवारों की धुरी को मजबूत बनाने के लिए इस तरह की परिचर्चाएं अब गली-मोहल्ले स्तर पर आयोजित की जाएं।
आदर्श बहुओं का हुआ सम्मान
माता-पिता के घर में कन्या जब तक रहती है, अपने भावी जीवन का निर्माण करती है। यह नींव मजबूत हो गई तो वह आदर्श नारी में रूपांतरित होकर समुन्नत परिवार, श्रेष्ठ व आदर्श समाज का ढांचा बन जाती है। ऐसी ही आदर्श बहुओं के लिए सम्मान समारोह आकर्षण का केंद्र रहा। विवाह के बाद अपने दूसरे परिवार में सभी सदस्यों को मन से अपनाकर परिवार को बांधकर रखने और व समुन्नत परिवार का निर्माण करने वालीं प्रीति सिंह, ममता भारद्वाज, गायत्री मेड़तवाल, अंजलि मिश्रा, सीमा मिश्रा और इवा वर्मा को अतिथियों ने प्रशस्ति-पत्र देकर और शॉल उढ़ाकर सम्मानित किया।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर लीडर्स आगरा कीं कोषाध्यक्ष वंदना सिंह, पार्षद श्यामवीर, वीरेंद्र मेड़तवाल, ओपी मेड़तवाल, राकेश जैन, डा. संजीव नेहरू, उल्लास दौनेरिया, संजय मिश्रा, करन सिंह, रॉबिन जैन, राहुल जैन, अंजलि गुप्ता, निर्मला शर्मा, श्रष्टि, पिंकी सविता, ऋतुराज दुबे, कैलाश मेड़तवाल, राजू सविता, शिखा जैन आदि मौजूद थे।