
World Heritage Day : दुनिया के सात अजूबों में शुमार प्यार के प्रतीक ताजमहल का दीदार करना अन्य इमारतों के मुकाबले सबसे महंगा है। इसके बावजूद ताज देखने के लिए हर साल करीब 60 लाख देसी-विदेशी पर्यटक आते हैं। इसी कारण ताज महल इनकम के मामले में देशभर में नंबर एक पर है। ताज के म्यूजियम की टिकट की राशि को भी जोड़ लें तो एक साल में यहां 100 करोड़ रुपये से अधिक की टिकट बिकती हैं। भारतीय पर्यटकों के लिए यहां 250 रुपये में टिकट उपलब्ध होती है तो विदेशी पर्यटक को 1300 रुपये का टिकट बेचा जाता है। कोरोना महामारी काल को छोड़ दें तो यहां महंगी टिकट का भी ताज का दीदार करने वालों पर कोई असर नहीं दिखाई देता है। वहीं अब एक बार फिर से टिकट के रेट 100 रुपये तक बढ़ाने की बात कही जा रही है। इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
एएसआई आगरा सर्किल की वेबसाइट के अनुसार, भारतीय पर्यटकों को अभी तक प्रवेश के लिए 50 रुपये का टिकट लेना होता है। जबकि मुख्य मकबरे पर जाने के लिए 200 रुपये का टिकट अलग से लगता है। इसी तरह विदेशों से आने वाले पर्यटकों को ताजमहल में प्रवेश के लिए 1100 रुपये का टिकट लेना पड़ता है। इसके बाद मुख्य मकबरे के लिए 200 रुपये का टिकट लेना होता है। इस तरह से एक विदेशी पर्यटक को 1300 रुपये तो भारतीय पर्यटक को 250 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। वहीं, सार्क देशों के पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क 500 रुपये और मुख्य मकबरे का टिकट 200 रुपये का है।
एक साल में 100 करोड़ से अधिक के टिकट बिके
आगरा का ताजमहल टिकट बिक्री के मामले में भारत में पहले नंबर पर है। कोरोना महामारी के दौर को छोड़ दें तो 2019-20 में 97.11 करोड़ रुपये के टिकट बिके थे। जबकि ताज परिसर के म्यूजियम के करीब 9 करोड़ रुपये के टिकट बिके थे। वहीं 2018-19 में 78 करोड़ के टिकट बिके थे। ताज के रखरखाव की बात करें तो 2019-20 में 4.73 करोड़ और 2018-19 में 5.30 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। हर साल 40 से 45 लाख भारतीय पर्यटक तो 8 से 9 लाख विदेशी पर्यटक ताज का दीदार करने पहुंचते हैं।
ताज का टिकट और महंगा होगा
ताजमहल की टिकट दर एक बार फिर से बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। एडीए कार्यालय पर कमिश्नर अमित गुप्ता की अध्यक्षता में बैठक के दौरान टिकट के रेट बढ़ाने पर सहमति बनी है। बैठक में घरेलू पर्यटक के प्रवेश टिकट 10 रुपये तो विदेशी पर्यटक के प्रवेश टिकट पर 100 रुपये बढ़ाने का प्रस्ताव पास किया गया है। अब इस प्रस्ताव को शासन को भेजा जाएगा। बता दें कि पिछली बार टिकट बढ़ाने का विरोध हुआ था, जिसके चलते टिकट के रेट बढ़ाने का निर्णय ठंडे बस्ते में चला गया था।