विश्व डाक दिवस आज
Ahmedabad शहर के जूनावाडज क्षेत्र में रहने वाले एडवोकेट प्रकाशचंद्र सोनी के पास दुर्लभ डाक टिकटों का संग्रह है। उनके पास न सिर्फ देश के बल्कि विदेश के भी डाक टिकटों का संग्रह है। वे पिछले 40 वर्ष से यह अनूठा संग्रह कर रहे हैं। इसमें डाक टिकट, पत्रों, यूपीसी के सर्टिफिकेट्स, अंतरदेशीय पत्र, जवाबी पोस्टकार्ड आदि शामिल हैं।मोबाइल फोन के इस युग में आज के बच्चे भले ही डाक सेवा से ज्यादा परिचित नहीं है लेकिन मोबाइल से पहले लोगों को जोड़ने की यह खास सुविधा थी। डाक की यह सेवा 15 पैसे, 25 पैसे और 50 पैसे में भी उपलब्ध हो जाती थी। हालांकि समय के साथ पोस्टकार्ड की कीमत बढ़ने पर उस पर अतिरिक्त टिकटें भी लगाई जाती थीं।प्रकाशचंद्र सोनी के टिकट संग्रह में पुराने डाक टिकटों पर किसान, प्राकृतिक सौंदर्य, भारतीय परिधान, परिवार नियोजन, अशोक स्तंभ, किसान, घोड़ा, महल, पानी की टंकी, बतख, जिराफ, बिल्ली, इंदिरा गांधी, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, देवनारायण, भारत के नेता, आभूषण, इम्पोर्टेड वस्तुएं, राजीव गांधी जैसे चित्र हैं। इस तरह लगभग 3500 टिकटों का संग्रह है।
एडवोकेट सोनी ने बताया कि उस दौरान लोग पोस्टमैन का बेसब्री से इंतजार करते थे। अपनों की खबर का जरिया यही हुआ करता था। इसके अलावा तार भी एक माध्यम था। लोग अपनों का पत्र पढ़कर खुश होते थे, एक के बाद एक परिवार के सभी सदस्य पढ़कर खुशियां बांटते थे।
एडवोकेट सोनी के पास 500 पुराने पत्र, 100 पुराने यूपीसी सर्टिफिकेट, 35 अंतरदेशीय पत्र, 40 जवाबी पोस्टकार्ड और 30 पत्र भी संग्रह में शामिल हैं। उनके पास जर्मनी, अमरीका, जापान, थाईलैंड, कनाडा, ब्रिटिश जैसे देशों के 65 से अधिक डाक टिकटें भी मौजूद हैं।