मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स के मामले में फंसाने की धमकी देकर साइबर माफियाओं ने मचाया आतंक राजकोट. शहर के साधु वासवानी रोड पर रहने वाले कोर्ट के रिटायर्ड क्लर्क को मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स केस में मुकदमा दर्ज होने का डर दिखाकर 45 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगों ने 88.50 लाख रुपए ठग […]
राजकोट. शहर के साधु वासवानी रोड पर रहने वाले कोर्ट के रिटायर्ड क्लर्क को मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स केस में मुकदमा दर्ज होने का डर दिखाकर 45 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगों ने 88.50 लाख रुपए ठग लिए। इस संबंध में राजकोट साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज कर भावनगर से बृजेश पटेल, मोहसिन शेख और मोहम्मद सोयब हालारी सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
जानकारी के अनुसार, साधु वासवानी रोड पर रहने वाले कोर्ट के रिटायर्ड असिस्टेंट क्लर्क दिनेश देलवाडिया (69) की शिकायत के आधार पर राजकोट साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज किया गया। शिकायत में बताया कि वे 2013 में रिटायर होने के बाद पत्नी अनिता के साथ रहते हैं और पिछले पांच वर्षों से एक ट्रस्ट में कमेटी सदस्य के रूप में सेवा दे रहे हैं।
8 जुलाई को सुबह उनके मोबाइल पर व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने कहा कि वह टेलीफोन विभाग से बोल रहा है और 10 मिनट बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच से सुनीलकुमार गौतम का फोन आएगा, उनसे बात कर लें। इसके बाद फोन कट कर दिया गया। 10 मिनट बाद एक अज्ञात व्हाट्सएप नंबर से कॉल आया और कॉलर ने कहा कि वह दिल्ली क्राइम ब्रांच से बोल रहा है। उसने बताया कि दिल्ली क्राइम ब्रांच में संदीप कुमार, जो आईसीआईसीआई बैंक के मैनेजर थे, के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज हुआ है। संदीप कुमार ने जो धोखाधड़ी की, उसमें से 10 प्रतिशत हिस्सा आपको दिया गया है, ऐसा सुप्रीम कोर्ट में उनके बयान में कहा गया है। संदीप कुमार के घर पर छापेमारी में 8 मिलियन रुपए नकद, 180 विभिन्न बैंकों की पासबुक, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, चेकबुक और बड़ी मात्रा में ड्रग्स जब्त किए गए हैं, जिनमें आप भी हिस्सेदार हैं।
कॉलर ने धमकी दी कि इस मामले में आपको जिंदगी भर जेल में रहना पड़ेगा। इस डर से दिनेश और पत्नी डर गए और उन्होंने इस बारे में किसी से बात नहीं की। थोड़ी देर बाद अनिता के मोबाइल पर व्हाट्सएप पर एक फोटो भेजा गया, जिसमें एक आरोपी को पुलिस के साथ पकड़ा गया दिखाया गया था। कॉलर ने दिनेश को धमकाया कि अगर यह बात किसी को बताई तो वे आकर उन्हें गिरफ्तार कर लेंगे। इसके बाद कॉलर ने कहा कि उनके बैंक खातों में 10 प्रतिशत राशि आई है या नहीं, यह जांचने के लिए उन्होंने एक खाता नंबर भेजा और उसमें 8 लाख रुपए जमा करने को कहा।
कॉलर ने एक बैंक का खाता नंबर और आइएफएससी कोड भेजा, जिसमें दिनेश ने 8 लाख रुपए का आरटीजीएस किया। साइबर ठगों ने कहा कि अगर आप निर्दोष होंगे तो जांच पूरी होने के बाद आपके पैसे वापस मिल जाएंगे। अगले दिन फिर से व्हाट्सएप कॉल आया और कहा गया कि उनके बैंक में लॉकर है और अगर उसमें सोना है तो निजी बैंक में जाकर गोल्ड लोन लेकर पैसे जमा करवाएं। दिनेश ने 8 लाख रुपए वापस करने को कहा, तो ठगों ने कहा कि पहले उनकी सारी राशि का सत्यापन होगा, फिर एक प्रमाण-पत्र दिया जाएगा और उसके बाद सारी राशि वापस कर दी जाएगी।
इस तरह 45 दिनों तक दंपती को डिजिटल अरेस्ट में रखकर, दिल्ली क्राइम ब्रांच की फर्जी पहचान देकर, अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल कर मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी देकर कुल 88.50 लाख रुपए ठग लिए गए। दिनेश ने यह बात अपने पुत्र क्रुणाल को बताई। उसने सीआईडी क्राइम गांधीनगर के हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल किया, इसके बाद राजकोट साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज कराया गया।
राजकोट साइबर क्राइम के एसीपी चिंतन पटेल के मार्गदर्शन में पीआई जे एम कैला और टीम ने जांच की। इसके आधार पर टीम ने भावनगर से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें भावनगर के सुभाषनगर निवासी बृजेश पटेल (36), भावनगर में जोगीवाड़ की टंकी के पास रहने वाले मोहसिन शेख (33), और भावनगर के प्रभुदास तालाब क्षेत्र निवासी मोहम्मद सोयब हालारी (30) शामिल हैं।
जांच में खुलासा हुआ कि बृजेश ने निजी बैंक में अपना चालू खाता खोला और उसमें मोहसिन और मोहम्मद सोयब को जोड़कर धोखाधड़ी के पैसे अपने खाते में ट्रांसफर करवाए। इन तीनों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में कुल 12 शिकायतें दर्ज की गई हैं।