अजमेर

अजमेर की सेंट्रल जेल से एक ही नंबर पर 1283 बार किया कॉल, इस नंबर से जुड़े खाते में 49.80 लाख के लेन-देन का भी खुलासा

Central Jail Ajmer: सेंट्रल जेल अजमेर में बंदियों को अवैध सुविधाएं और नशे की गोलियां उपलब्ध कराने के आरोपों की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
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Aug 21, 2026
Ghughra High-Security Jail
Ajmer Jail : हाई सिक्योरिटी जेल। फाइल फोटो पत्रिका

अजमेर। सेंट्रल जेल अजमेर में बंदियों को अवैध सुविधाएं और नशे की गोलियां उपलब्ध कराने के आरोपों की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जेल प्रशासन की रिपोर्ट पर सिविल लाइंस थाना पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। यह कार्रवाई सजायाफ्ता बंदी की करीब दो साल पुरानी शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद हुई।

पुलिस के अनुसार सेंट्रल जेल अजमेर की एसटीडी सुविधा से एक मोबाइल नंबर पर 1283 बार कॉल किए गए। यह नंबर 15 से अधिक बंदियों की एसटीडी सुविधा में दर्ज मिला। जांच में इस नंबर से जुड़े बैंक खाते में 1 जनवरी 2024 से 20 अप्रेल 2026 तक 49 लाख 79 हजार 967 रुपए के क्रेडिट लेन-देन का पता चला।

बता दें कि अजमेर की जेलों में सुरक्षा के चूक के मामले पहले भी सामने आ चुके है। इसी साल जून महीने में अजमेर की एक हाई सिक्योरिटी जेल में कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या का मामला सामने आया था। बैरक में ही बंद बंदी विष्णु ने गला घोंटकर जगन गुर्जर की हत्या कर दी थी। ऐसे में अब अजमेर की सेंट्रल जेल में हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जेल से एक ही नंबर पर 1283 बार कॉल किया गया। हैरान कर देने वाली बात ये है कि इस नंबर से जुड़े खाते में 49.80 लाख के लेन-देन का भी पता चला है।

सजायाफ्ता बंदी ने की थी शिकायत

हत्या के दो मामलों में सजा काट रहे बंदी भीखाराम ने 22 जुलाई 2025 को डीजी जेल को शिकायत भेजी थी। उसने विचाराधीन बंदी करणसिंह और कमलसिंह पर मारपीट, धमकी देने और बंदियों को नशे की गोलियां उपलब्ध कराने का आरोप लगाया था। शिकायत के अनुसार जेल में एक गोली के 500 रुपए तक वसूले जाते थे और रकम जेल के बाहर जयराम नामक व्यक्ति के खाते में ऑनलाइन जमा कराई जाती थी। जांच में जयराम के खाते में उक्त अवधि में करीब 49.80 लाख रुपए जमा होने की बात सामने आई। उसका मोबाइल नंबर तीन बैंक खातों से जुड़ा मिला, जिनमें से दो की जानकारी अभी सामने आना बाकी है।

जेल स्टाफ की भूमिका भी जांच में

जांच में जयराम के चचेरे भाई शिवराजसिंह का नाम भी सामने आया। उसने पुलिस को बताया कि वह कभी-कभी जेल में बंद लोगों के लिए जरूरी सामान पहुंचाता था और इसके बदले परिजन ऑनलाइन भुगतान करते थे। एक ही बाहरी नंबर का कई बंदियों की एसटीडी सुविधा में दर्ज होना और जेल से उस पर लगातार कॉल किए जाने से जेलकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

इनके खिलाफ मामला दर्ज

जेल अधीक्षक आर. अन्तेश्वरन ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आरोप सामने आने के बाद विचाराधीन बंदी करणसिंह, कमल, जयराम, शिवराज और धनराज के खिलाफ मारपीट, धमकी और निषिद्ध सामग्री जेल परिसर में पहुंचाने के आरोप में मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस अनुसंधान के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

Updated on:
21 Aug 2026 09:44 am
Published on:
21 Aug 2026 09:19 am