अजमेर के बोराड़ा में पूर्व सरपंच परिवार की मौत का सनसनीखेज खुलासा। सड़क हादसे और कार में आग की कहानी निकली झूठी, पहली पत्नी सुनीता ने बच्चों संग मिलकर की थी हत्या।
राजस्थान के अजमेर जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली आपराधिक खबर सामने आ रही है। जिले के बोराड़ा थाना क्षेत्र में पूर्व सरपंच परिवार के सदस्यों की कार में जलकर हुई रहस्यमयी मौत का मामला अब पूरी तरह से तिहरे हत्याकांड में तब्दील हो चुका है। पुलिस की शुरुआती जांच में जिसे एक दर्दनाक सड़क हादसा और कार की तकनीकी खराबी के कारण लगी आग माना जा रहा था, वह वास्तव में एक सोची-समझी हत्या की साजिश निकली। अजमेर पुलिस ने इस पूरे मामले का आधिकारिक तौर पर पटाक्षेप करते हुए बताया कि घटना की मुख्य सूत्रधार पूर्व सरपंच के परिवार से जुड़ी पहली पत्नी सुनीता है। सुनीता ने अपने ही नाबालिग बेटे और बेटी के साथ मिलकर इस पूरे जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया और बाद में कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए साक्ष्यों को नष्ट करने के इरादे से पूरी कार को आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के बल पर इस पूरे मर्डर मिस्ट्री का पर्दाफाश किया है।
इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना की शुरुआत बोराड़ा के श्रीरामपुरा फार्म हाउस के पास से हुई थी, जहां एक सुनसान रास्ते पर पूरी तरह से जली हुई कार बरामद की गई थी। उस कार के भीतर से तीन लोगों के बुरी तरह झुलसे हुए शव मिले थे, जिनकी पहचान पूसी देवी, रामसिंह और महिमा के रूप में की गई थी। इसके अलावा, एक अन्य महिला सुरज्ञान देवी कार के बाहर अत्यधिक अधजली हालत में पड़ी हुई मिली थी, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई थी।
शुरुआती दौर में इस घटना को एक सामान्य एक्सीडेंट के रूप में देखा जा रहा था, जिसमें गाड़ी के टकराने या शॉर्ट सर्किट होने के बाद आग लगने की बात कही जा रही थी। पूर्व सरपंच परिवार के इतने सदस्यों की एक साथ मौत होने के कारण स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश और शोक की लहर थी। लेकिन जब पुलिस की फॉरेंसिक टीम और स्थानीय अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, तो वहां कुछ ऐसे सुराग मिले जिन्होंने पूरी तफ्तीश का रुख ही बदल कर रख दिया।
अजमेर जिला पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला के निर्देशन में जब बोराड़ा पुलिस ने जली हुई गाड़ी और उसके आसपास के क्षेत्र का वैज्ञानिक विश्लेषण किया, तो फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को शवों की स्थिति सामान्य दुर्घटना जैसी नहीं लगी। सबसे बड़ा सुराग शवों पर मौजूद संघर्ष के निशान और चोटों के पैटर्न से मिला। यदि यह केवल एक कार हादसा होता, तो गाड़ी के भीतर बैठे लोगों की स्थिति और उनके शरीर पर धारदार हथियार के प्रहार जैसे गंभीर निशान नहीं मिल सकते थे।
इसके साथ ही, कार के बाहर अधजली हालत में मिली सुरज्ञान देवी की स्थिति ने भी पुलिस के संदेह को और पुख्ता कर दिया। घटनास्थल पर मौजूद मिट्टी, खून के छींटे और कार के भीतर की आंतरिक संरचना के अध्ययन से यह स्पष्ट होने लगा था कि पीड़ितों को कार में आग लगाने से पहले ही मौत के घाट उतार दिया गया था या फिर उन पर जानलेवा हमला कर उन्हें अचेत किया गया था। यहीं से पुलिस ने हादसे की थ्योरी को खारिज करते हुए मर्डर के एंगल पर अपनी जांच केंद्रित की।
जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने संदिग्धों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR), लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों को खंगालना शुरू किया। इस दौरान पूर्व सरपंच की पहली पत्नी सुनीता के बयानों में भारी विरोधाभास देखने को मिला। जब पुलिस ने सुनीता से शुरुआती पूछताछ की, तो वह लगातार पुलिस टीम को गुमराह करने और जांच की दिशा भटकाने का प्रयास करती रही।
जब साइबर सेल की मदद से सुनीता और उसके सहयोगियों की घटना के समय की सटीक लोकेशन, आपसी बातचीत के कॉल लॉग्स और अन्य तकनीकी साक्ष्य उसके सामने रखे गए, तो उसके बनाए हुए झूठ के सारे किले ढह गए। तकनीकी साक्ष्यों ने यह पूरी तरह साफ कर दिया कि घटना के वक्त सुनीता और उसके बच्चे उसी क्षेत्र में मौजूद थे और उनके बीच कुछ संदिग्ध गतिविधियां संचालित हो रही थीं।
कड़ी पूछताछ और वैज्ञानिक सबूतों के आगे घुटने टेकते हुए आखिरकार मुख्य आरोपी सुनीता ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस तफ्तीश में जो सच सामने आया वह बेहद चौंकाने वाला था। सुनीता ने अपने नाबालिग पुत्र और पुत्री के साथ मिलकर घरेलू विवाद या पारिवारिक रंजिश के चलते पूसी देवी, रामसिंह और महिमा पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ वार किए, जिससे उनकी मौत हो गई।
इस खौफनाक कृत्य को अंजाम देने के बाद, कानूनी शिकंजे से बचने के लिए सुनीता ने एक शातिर अपराधी की तरह दिमाग दौड़ाया। उसने सभी शवों को कार के भीतर डाला और सबूतों को हमेशा-हमेशा के लिए मिटाने के उद्देश्य से कार पर ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर उसमें आग लगा दी, ताकि पूरी दुनिया इसे एक कार दुर्घटना मानकर भूल जाए। लेकिन वे कहते हैं ना कि 'कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं', अपराधियों की एक छोटी सी चूक ने इस पूरे तिहरे हत्याकांड का पर्दाफाश कर दिया।
सूचना पर पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला, किशनगढ़ ग्रामीण डिप्टी आयुष वशिष्ठ, बोराड़ा थानाधिकारी सूर्यभानसिंह व अरांई थानाधिकारी रोशन सामरिया मौके पर पहुंचे। एफएसएल, एमओबी टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने शुरू किए। पुलिस को परिस्थितियां पहले से ही संदिग्ध लगीं। इसके बाद जांच टीम रामसिंह चौधरी के घर पहुंची, जहां फर्श धुला हुआ मिला। गहन जांच में घर के विभिन्न हिस्सों से खून के निशान मिले। एफएसएल टीम ने मौके से खून के नमूने एकत्र किए, जिससे हत्या की आशंका और गहरा गई।
पुलिस जांच में सामने आया कि रामसिंह चौधरी का पहली पत्नी सुनीता से लंबे समय से विवाद चल रहा था। बुधवार देर रात को भी उनमें विवाद हुआ। विवाद बढ़ने पर पहली पत्नी सुनिता ने बेटी सरिता व नाबालिग पुत्र ने षड्यंत्रपूर्वक चारों की धारदार हथियार से हत्या कर दी। बाद में शवों को घर से कुछ दूर स्कॉर्पियो में डालकर आग लगा दी, ताकि पूरे मामले को सड़क हादसा साबित किया जा सके।
पुलिस ने मामले में प्राइम सस्पेक्ट सुनिता और उसके बच्चों को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो कुछ मिनट में तीनों टूट गए। पूछताछ में सुनिता ने वारदात कबूल कर ली। पुलिस मामले में हत्या का मुकदमा दर्जकर रामसिंह की पहली पत्नी सुनिता, बेटी सरिता और नाबालिग पुत्र को डिटेन कर लिया।
पुलिस टीम ने वारदात में इस्तेमाल हथियार और अन्य साक्ष्यों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया। कुछ घंटे की मशक्कत के बाद ही पुलिस ने घर से कुछ दूरी पर कुएं पर छुपाया गया खून से सना धारदार हथियार बरामद कर लिया। इससे साफ हो गया कि हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित सामूहिक हत्याकांड है। एफएसएल और एमओबी टीम पहले ही घर के आंगन से खून के निशान उठा चुकी थी।
पुलिस ने प्रारंभिक पड़ताल में ग्रामीणों से मिली छोटी-छोटी सूचना को जोड़ते हुए अनुसंधान शुरू किया। एफएसएल टीम ने छोटी-छोटी सूचनाओं को जोड़ते हुए महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं।
पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला ने बताया कि बोराड़ा थाना क्षेत्र के श्रीरामपुरा गांव में सुबह चार लोगों के जले हुए शव मिले। एफएसएल, एमओबी टीम ने मौके से कुछ घंटों में महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं। प्रारंभिक जांच में पारिवारिक विवाद सामने आया। पहली पत्नी सुनीता, उसकी बेटी सरिता और नाबालिग पुत्र से पूछताछ की जा रही है। पत्नी सुनीता ने वारदात अंजाम देना कबूल लिया है।