
Jaipur Anu Meena Case
जयपुर के 'अनु मीणा खुदकुशी प्रकरण' में एक बेहद चौंकाने वाला और नया घटनाक्रम सामने आया है। दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने के गंभीर आरोपों के बाद से लगातार फरार चल रहे मृतका के पति और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के एक्सईएन (XEN) गौतम मीणा ने एक वीडियो संदेश जारी कर इस पूरे मामले पर अपनी तरफ से सफाई पेश की है। इस वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद जयपुर कमिश्नरेट पुलिस और जांच अधिकारियों के बीच अचानक हलचल तेज हो गई है। दरअसल, गौतम मीणा द्वारा जारी किए गए इस वीडियो में वह कैमरे के सामने भावुक और रोता हुआ दिखाई दे रहा है। उसने इस दुखद घटना के लिए खुद को पूरी तरह से निर्दोष बताते हुए अपनी मृत पत्नी अनु मीणा के पीहर पक्ष यानी अपने ससुराल के लोगों पर बेहद गंभीर और कानूनी रूप से संवेदनशील आरोप मढ़े हैं। उसका दावा है कि उसे इस मामले में जानबूझकर फंसाया जा रहा है और उसके पक्ष में जितने भी डिजिटल व भौतिक सबूत थे, उन्हें साजिश के तहत हटा दिया गया है।
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि की बात करें तो जयपुर के स्थानीय पुलिस थाने में मृतका अनु मीणा के सगे भाई ने बीते 15 मई 2026 को एक आपराधिक मुकदमा दर्ज करवाया था। इस एफआईआर (FIR) में अनु के भाई ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद से ही उसका पति गौतम मीणा और परिवार के अन्य सदस्य अनु को लगातार कीमती सामान और अत्यधिक दहेज के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे।
इसी प्रताड़ना और रोज-रोज के घरेलू क्लेश से तंग आकर अनु मीणा ने अत्यंत आत्मघाती कदम उठाते हुए अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर आरोपी पति गौतम मीणा के खिलाफ दहेज हत्या, क्रूरता और खुदकुशी के लिए मजबूर करने की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही पुलिस की विभिन्न टीमें आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही थीं, लेकिन वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका और अब उसका यह वीडियो सामने आया है।
फरार आरोपी एक्सईएन गौतम मीणा ने अपने वीडियो बयान में पीहर पक्ष पर गंभीर वित्तीय और मानसिक शोषण के आरोप लगाए हैं। गौतम का कहना है कि अनु की मृत्यु के बाद से ही उसे लगातार सामाजिक और कानूनी रूप से ब्लैकमेल किया जा रहा है। उसने कैमरे के सामने दावा किया कि उसके ससुराल वालों की नजर हमेशा से उसकी अर्जित संपत्ति पर थी।
गौतम मीणा ने वीडियो में रोते हुए कहा, "मुझे पूरी तरह से बर्बाद करने की साजिश रची जा रही है। मेरे ससुराल के लोगों ने दबाव और धमकियों के बल पर मेरी गाढ़े पसीने की कमाई से खरीदी गई कुल अचल संपत्तियों का करीब 70 प्रतिशत (70%) हिस्सा पहले ही अवैध रूप से अपने नाम करवा लिया और हड़प लिया है। इसके बावजूद उनकी मांगें कम नहीं हो रही थीं। मेरे पास खुद को बेकसूर साबित करने के लिए जो भी डिजिटल एविडेंस, चैट्स और रिकॉर्डिंग्स मौजूद थीं, उन सभी सबूतों को योजनाबद्ध तरीके से नष्ट कर दिया गया है या मेरे फोन और सिस्टम से डिलीट करवा दिया गया है, ताकि मैं कानून के सामने अपनी सच्चाई न रख सकूं।"
गौतम मीणा ने इस जारी वीडियो में उस मनहूस दिन यानी 7 अप्रैल 2026 को घटित हुए पूरे घटनाक्रम की एक-एक कड़वी सच्चाई और क्रोनोलॉजी को विस्तार से बयां किया है, जो इस केस का सबसे मुख्य और तकनीकी हिस्सा बन चुका है। गौतम के अनुसार, उस दिन सुबह उनके बीच कोई बड़ा विवाद नहीं था, बल्कि सब कुछ सामान्य लग रहा था।
गौतम ने बताया, "7 अप्रैल को मैंने खुद अपने दोनों बच्चों को पूरी सुरक्षा के साथ बस में बिठाकर उनके ननिहाल (मेरे ससुराल) के लिए रवाना किया था। इसके बाद मैंने निवाई स्थित अपने सरकारी दफ्तर में कुछ जरूरी आधिकारिक काम निपटाए। अनु से फोन पर सामान्य बातचीत करने के बाद मैं घर का कुछ घरेलू सामान और कंस्ट्रक्शन मटीरियल लेकर चौमूं के लिए रवाना हो गया, क्योंकि चौमूं में मेरे एक प्लॉट पर निर्माण कार्य चल रहा था। जब मैं रास्ते में था, तब अनु का लगातार दो बार फोन आया। वह मुझसे बार-बार तुरंत घर वापस आने की जिद कर रही थी। लेकिन चूंकि मैं चौमूं के बिल्कुल नजदीक पहुंच चुका था, इसलिए मैंने उससे कहा कि मैं यह काम निपटाकर शाम तक वापस आ जाऊंगा और तुरंत आने से असमर्थता जताई।"
वीडियो में आगे की कहानी बयां करते हुए गौतम ने कहा कि उसके इनकार करने के तुरंत बाद अनु ने उसे सामान्य वॉयस कॉल काटकर सीधे व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल किया। जब गौतम ने कॉल रिसीव किया, तो दृश्य देखकर उसके होश उड़ गए। अनु हाथ में फंदे के रूप में इस्तेमाल होने वाली चुन्नी (दुपट्टा) लेकर घर की ऊपरी मंजिल की तरफ सीढ़ियों से जा रही थी।
गौतम ने वीडियो में दावा किया, "मैंने वीडियो कॉल पर उसे लाइव देखा। मैंने उसे बहुत समझाने की कोशिश की, पैर पकड़े, बच्चों की कसमें दीं और हाथ जोड़कर ऐसा न करने की मिन्नतें कीं। लेकिन वह अत्यंत गुस्से और अवसाद में थी और उसने मेरी एक न सुनी। मैं गाड़ी चला रहा था और घर से दूर था, इसलिए मैंने तुरंत अपने पड़ोस में रहने वाले एक स्थानीय युवक दिग्विजय को फोन मिलाया। मैंने दिग्विजय से रोते हुए कहा कि तुम तुरंत भागकर मेरे घर जाओ और किसी भी तरह मुख्य गेट और कमरे का दरवाजा तोड़कर भीतर दाखिल हो जाओ। दिग्विजय तुरंत मेरे घर की तरफ भागा भी, लेकिन मुख्य दरवाजा अंदर से बहुत मजबूती से बंद होने के कारण उसे तोड़ने में कुछ कीमती मिनटों का समय लग गया। जब तक दरवाजा टूटा और लोग भीतर पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और अनु को बचाया नहीं जा सका।"
इस पूरे हाई-प्रोफाइल मामले में सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर केवल आरोपी पति का रोने वाला सफाई वीडियो ही नहीं घूम रहा है, बल्कि इस केस से जुड़ा एक और बेहद सकारात्मक और पुराना वीडियो फुटेज भी तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो उस समय का है जब एक्सईएन गौतम मीणा की निवाई में नई पोस्टिंग हुई थी।
इस वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि एक्सईएन गौतम मीणा बड़े ही आदर और सरोकार के साथ अपनी पत्नी अनु मीणा से अपने निवाई स्थित नए सरकारी कार्यालय (XEN Office) का फीता कटवाकर और दीप प्रज्वलित करवाकर उद्घाटन करवा रहे हैं। इस वीडियो को देखने वाले आम नागरिकों और विधिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस फुटेज में पति-पत्नी के बीच आपसी संबंध और तालमेल बेहद मधुर और सम्मानजनक दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर इस बहस को हवा दे रहा है कि आखिर इतने अच्छे संबंधों के बीच अचानक ऐसा क्या हुआ कि बात आत्महत्या जैसे खौफनाक कदम तक पहुंच गई।
फरार आरोपी पति गौतम मीणा द्वारा वीडियो जारी किए जाने और उसमें लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद जयपुर कमिश्नरेट के जांच अधिकारी और सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) आदित्य काकड़े ने पुलिस का पक्ष मीडिया के सामने रखा है। पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि वे सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो के आधार पर कोई अंतिम राय नहीं बना रहे हैं, बल्कि हर पहलू की विधिक जांच की जा रही है।
एसीपी आदित्य काकड़े ने आधिकारिक रूप से बयान जारी करते हुए कहा, "अनु मीणा सुसाइड केस की गहन और बिंदुवार जांच पुलिस द्वारा पूरी निष्पक्षता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ निरंतर की जा रही है। कानून की नजर में सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करना आत्मसमर्पण या जांच में शामिल होना नहीं माना जाता। आरोपी पति गौतम मीणा को चाहिए कि वह कानून का सम्मान करते हुए तुरंत पुलिस के समक्ष उपस्थित हो और अपने पक्ष में जो भी बातें या सबूत वह कह रहा है, उन्हें विधिक रूप से जांच अधिकारी के सामने प्रस्तुत करे। पुलिस पीहर पक्ष और पति पक्ष दोनों के बयानों, कॉल डिटेल्स (CDR) और डिजिटल साक्ष्यों का मिलान करने के बाद ही किसी तार्किक और कानूनी निष्कर्ष पर पहुंचेगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और किसी निर्दोष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।"
Updated on:
27 May 2026 03:44 pm
Published on:
27 May 2026 03:30 pm
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