
Rajasthan Senior Citizen Free Tirth Yatra Yojana - AI PIC
राजस्थान के बुजुर्गों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए राज्य के देवस्थान विभाग की ओर से एक बेहद काम की योजना है। राज्य सरकार की 'वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना' के तहत इस वर्ष हजारों बुजुर्गों को देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों की मुफ्त यात्रा कराने के लिए ऑनलाइन आवेदन आज यानी 27 मई 2026 से खोल दी गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के उन जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर बुजुर्गों को धार्मिक यात्रा का अवसर देना है, जो अपनी वित्तीय स्थिति के कारण पवित्र स्थलों के दर्शन करने से वंचित रह जाते हैं। देवस्थान विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, इच्छुक और पात्र वरिष्ठ नागरिक आगामी 10 जून 2026 तक इस योजना का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन माध्यम से अपना पंजीकरण करवा सकते हैं।
इस बार सरकार ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रबंध किए हैं, जिसके तहत यात्रा के दौरान वातानुकूलित (AC) स्पेशल ट्रेनों और विमान सेवाओं का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही यात्रियों के लिए भोजन, ठहरने की व्यवस्था, सुरक्षा, चिकित्सा और सहायक स्टाफ की तमाम सुविधाएं पूरी तरह से सरकारी खर्चे पर उपलब्ध कराई जाएंगी।
देवस्थान विभाग ने इस योजना के अंतर्गत आवेदन करने वाले नागरिकों के लिए सबसे पहली और महत्वपूर्ण शर्त यह रखी है कि आवेदक अनिवार्य रूप से राजस्थान राज्य का मूल निवासी होना चाहिए। इसके बिना आवेदन स्वतः ही निरस्त माना जाएगा। इसके साथ ही आवेदक की उम्र सीमा को लेकर भी विभाग ने स्पष्ट नियम जारी किए हैं, ताकि किसी भी स्तर पर दस्तावेजों के सत्यापन में कोई तकनीकी समस्या न आए।
योजना के नियमों के मुताबिक, आवेदन करने वाले बुजुर्ग की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। इस आयु की सटीक गणना के लिए विभाग ने 1 अप्रैल 2026 की तिथि को आधार (कट-ऑफ डेट) माना है। इसका सीधा तकनीकी अर्थ यह है कि यात्रा के लिए केवल वही वरिष्ठ नागरिक ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं जिनका जन्म 1 अप्रैल 1966 से पूर्व का हुआ हो। आवेदन करते समय आयु प्रमाण पत्र के रूप में जन आधार कार्ड या अन्य वैध राजकीय दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य होगा।
इस वर्ष की तीर्थ यात्रा योजना में हवाई सफर को लेकर देवस्थान विभाग ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्ग इस बार हवाई जहाज के माध्यम से होने वाली तीर्थ यात्रा के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे। इस नियम के पीछे पूरी तरह से सुरक्षात्मक और तकनीकी कारण जिम्मेदार हैं।
विभागीय गाइडलाइंस के अनुसार, हवाई यात्रा के दौरान 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों का बीमा करने में विभिन्न तकनीकी दिक्कतें आती हैं। यात्रा के दिन हवाई टिकट बुक करने की प्रक्रिया में इस वजह से व्यवधान उत्पन्न होता है, जिससे पूरी यात्रा का शेड्यूल प्रभावित होने का खतरा रहता है।
इसी प्रशासनिक समस्या को देखते हुए विभाग ने तय किया है कि 80 वर्ष और इससे अधिक उम्र के यात्री हवाई यात्रा श्रेणी में आवेदन नहीं कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, हवाई यात्रा के दौरान किसी भी स्थिति में किसी सहायक (Attendant) को साथ ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
यह योजना पूरी तरह से समाज के आर्थिक रूप से कमजोर, वंचित और जरूरतमंद बुजुर्गों को समर्पित है। यही कारण है कि देवस्थान विभाग ने संपन्न वर्ग और पूर्व लोक सेवकों को इस योजना के दायरे से बाहर रखने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान किए हैं। आवेदन प्रक्रिया के दौरान प्रत्येक नागरिक को अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर पूरी तरह सत्य जानकारी साझा करनी होगी।
नियमों के मुताबिक, यदि आवेदक स्वयं या उसका जीवनसाथी (पति/पत्नी) आयकरदाता (Income Tax Payee) है, तो वे इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते। आवेदकों को फॉर्म के साथ इस आशय का एक 'स्व-घोषणा प्रमाण पत्र' (Self Declaration Certificate) अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा।
इसके अलावा, यदि आवेदक या उसका जीवनसाथी केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्वायत्तशासी संस्थाओं, स्थानीय निकायों या किसी भी सरकारी उपक्रम (PSU) से सेवानिवृत्त राजपत्रित अधिकारी (Retired Gazetted Officer) हैं, तो वे भी इस मुफ्त यात्रा योजना के लिए पूरी तरह अपात्र माने जाएंगे। इसके साथ ही, भिक्षावृत्ति (भीख मांगकर) पर जीवन यापन करने वाले लोगों को भी इस योजना के तहत शामिल नहीं किया जाएगा।
योजना की पारदर्शिता और अधिक से अधिक नए बुजुर्गों को मौका देने के उद्देश्य से विभाग ने 'वन-टाइम बेनिफिट' (One-Time Benefit) का नियम कड़ाई से लागू किया है। देवस्थान विभाग ने साफ कर दिया है कि जिन नागरिकों ने पूर्व में कभी भी राजस्थान सरकार की इस वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना का लाभ उठाया है, वे इस बार आवेदन करने के योग्य नहीं होंगे।
यह पाबंदी केवल मुख्य आवेदक पर ही नहीं, बल्कि सहयात्री या जीवनसाथी के रूप में यात्रा कर चुके व्यक्तियों पर भी समान रूप से लागू होती है। यदि कोई व्यक्ति पहले कभी अपने पति या पत्नी के साथ सहयोगी के तौर पर भी इस योजना के तहत देश के किसी तीर्थ स्थल की यात्रा कर चुका है, तो वह इस बार दोबारा किसी भी तीर्थ की यात्रा के लिए पात्र नहीं माना जाएगा।
आवेदकों को अपने फॉर्म के साथ यह लिखित वचन देना होगा कि उन्होंने पहले कभी इस सरकारी योजना का लाभ नहीं लिया है। यदि बाद में जांच में कोई जानकारी गलत पाई जाती है, तो उनके खिलाफ दंडात्मक कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
चूंकि तीर्थ यात्रा के दौरान लंबी दूरी का सफर तय करना होता है और कई धार्मिक स्थल पहाड़ी या विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों में स्थित होते हैं, इसलिए यात्रियों का स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण पहलू बन जाता है। देवस्थान विभाग ने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सा जांच को आवेदन प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा बना दिया है।
गाइडलाइंस के तहत, आवेदक का शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ होना आवश्यक है। वह किसी भी प्रकार के संक्रामक रोग (Contagious Disease) से ग्रसित नहीं होना चाहिए। इस नियम की पालना के लिए प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक को आवेदन पत्र के साथ किसी पंजीकृत सरकारी या अधिकृत चिकित्सा अधिकारी (Medical Officer) द्वारा जारी किया गया स्वास्थ्य प्रमाण पत्र अपलोड करना होगा। इस प्रमाण पत्र में डॉक्टर को स्पष्ट रूप से यह प्रमाणित करना होगा कि संबंधित वृद्ध व्यक्ति प्रस्तावित लंबी धार्मिक यात्रा करने के लिए शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट और सक्षम है।
विशेष एसी ट्रेनों के माध्यम से होने वाली रेल यात्रा के लिए विभाग ने सहयात्रियों और सहायकों को लेकर बेहद विस्तृत और सुस्पष्ट नियम बनाए हैं, जिनका अध्ययन आवेदन करने से पहले हर बुजुर्ग को ध्यानपूर्वक कर लेना चाहिए। इन नियमों का उद्देश्य रेल के भीतर कोच प्रबंधन और बुजुर्गों की वास्तविक सहायता को सुगम बनाना है।
सहायक और जीवनसाथी से जुड़े मुख्य नियम इस प्रकार हैं:
75 वर्ष से अधिक उम्र पर विशेष छूट: सामान्य तौर पर, यदि पति-पत्नी दोनों एक साथ रेल यात्रा कर रहे हैं, तो उन्हें अपने साथ अलग से किसी तीसरे व्यक्ति (सहायक) को ले जाने की सुविधा नहीं मिलेगी। लेकिन, यदि पति और पत्नी दोनों की ही आयु 75 वर्ष से अधिक है, तो वे अपने साथ एक सहायक को पंजीकृत कर सकते हैं और उसे यात्रा पर ले जाने की अनुमति विभाग द्वारा दी जाएगी।
जीवनसाथी का विवरण: यदि कोई बुजुर्ग अपनी यात्रा में अपने पति या पत्नी को साथ ले जाना चाहता है, तो उसे ऑनलाइन आवेदन पत्र में दिए गए 'जीवनसाथी' के कॉलम को अनिवार्य रूप से भरना होगा।
सहायक की आयु और योग्यता: रेल यात्रा में साथ जाने वाले सहायक की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए। सहायक का शारीरिक रूप से स्वस्थ होना और बुजुर्ग की देखभाल के लिए फिट होना आवश्यक है। आवेदन करते समय सहायक का पहचान पत्र और विवरण देना अनिवार्य होगा।
Updated on:
27 May 2026 12:45 pm
Published on:
27 May 2026 12:20 pm
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