
Ajmer Jail : सेन्ट्रल जेल अजमेर स्थित महिला सुधार गृह से दो महिला बंदियों को नियमों के विरुद्ध कारागार परिसर से बाहर ले जाने के मामले में जेलर व प्रहरी के खिलाफ सिविल लाइंस थाने ने आपराधिक मामला दर्ज किया है। जेल प्रशासन की शिकायत पर पुलिस ने प्रकरण दर्जकर अनुसंधान शुरू कर दिया है। थाना प्रभारी शम्भू सिंह शेखावत ने बताया कि महानिदेशालय कारागार जयपुर के आदेश पर अजमेर सेन्ट्रल जेल अधीक्षक ने जेल प्रहरी महिपाल मांगलोदा के जरिए सिविल लाइंस थाने में तत्कालीन प्रभारी और जेलर दिव्या चौधरी व महिला प्रहरी सोनिया चौधरी के खिलाफ बीएनएस की धारा 260(क), 260(ख) एवं 61(2) के मुकदमा दर्ज करवाया है।
पत्रिका ने 14 जुलाई के अंक में ‘महिला सुधार गृह से 2 बंदियों को नियम विरुद्ध बाहर ले गईं जेलर’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर पूरे मामले का खुलासा किया था। खबर प्रकाशित होने के अगले ही दिन 15 जुलाई को जेल मुख्यालय ने तत्कालीन प्रभारी जेलर दिव्या चौधरी और महिला प्रहरी सोनिया चौधरी को महिला सुधार गृह से हटाकर जयपुर मुख्यालय तलब कर लिया था। इसके बाद डीजी (जेल) अशोक राठौड़ ने उन्हें निलंबित करते हुए क्रमश: केन्द्रीय कारागार बीकानेर और केन्द्रीय कारागार जोधपुर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया था।
महानिदेशालय कारागार, जयपुर के 4 अगस्त के आदेश की पालना में सेन्ट्रल जेल अधीक्षक ने 5 अगस्त को सिविल लाइंस थाने में लिखित रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट में बताया कि 12 जुलाई दोपहर करीब पौने 3 बजे तत्कालीन प्रभारी जेलर दिव्या चौधरी व महिला प्रहरी सोनिया चौधरी ड्यूटी पर मौजूद जेल प्रहरी के विरोध के बावजूद नियमों की अवहेलना करते हुए 2 महिला बंदियों को कारागार परिसर से बाहर ले गईं थी। सिविल लाइंस थाना पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच एएसआई मनोज मीणा को सौंप दी है।
जेल प्रशासन की ओर से दर्ज करवाई गई एफआईआर में जिन 2 महिला बंदियों को बाहर ले जाया गया था, इनमें हत्या के प्रकरण में सजायाफ्ता महिला बंदी भिनाय के उदयगढ़ खेड़ा, नाहर बाबा का बाड़िया निवासी किरण व दूसरी विचाराधीन बंदी डीडवाना-कुचामन के मकराना गोडाबास निवासी सना अहमद हैं।
कारागार प्रशासन ने रिपोर्ट में बताया कि दोनों महिला बंदियों को नियमानुसार अनुमति के बिना व स्थापित प्रक्रिया का पालन किए बिना जेल परिसर से बाहर ले जाया गया। रिपोर्ट में नियम विरुद्ध व अवैधानिक कृत्य बताते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। पुलिस जांच में यह भी पड़ताल की जाएगी कि महिला बंदियों को किस उद्देश्य से बाहर ले जाया गया, क्या इसके लिए किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति थी और पूरे घटनाक्रम में किन-किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है।