
अजमेर: तमाम दावों और आशंकाओं को ध्वस्त करते हुए भाजपा सोमवार को आठवीं बार अजमेर नगर निगम में बोर्ड बनाने में कामयाब रही। भाजपा की अनामिका शर्मा एकतरफा मुकाबले में कांग्रेस की किरण गढ़वाल को हराकर महापौर निर्वाचित हुईं। अनामिका ने 43 और गढ़वाल ने 37 वोट हासिल किए। चुनाव में भाजपा से 5 पार्षद ज्यादा जीतने के बावजूद कांग्रेस मुकाबले में पिछड़ गई।
भाजपा की वार्ड 3 की पार्षद अनामिका शर्मा और कांग्रेस की वार्ड 57 की पार्षद किरण गढ़वाल के बीच महापौर पद का मुकाबला था। सोमवार सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक मतदान हुआ। रिटर्निंग अधिकारी अनिल पूनिया की अगुवाई में महज 15 मिनट में परिणाम घोषित हो गया।
अजमेर नगर निगम के महापौर चुनाव में बीजेपी की प्रत्याशी अनामिका शर्मा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। परिणाम घोषित होते ही विजय के इस ऐतिहासिक अवसर पर एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। अपनी सफलता का श्रेय परिवार और पार्टी के मार्गदर्शन को देते हुए, अनामिका शर्मा तुरंत अपने ससुर और वरिष्ठ भाजपा नेता सीताराम शर्मा के पास पहुंचीं।
उन्होंने अपने ससुर के गले लगकर चरण स्पर्श किए और उनका आशीर्वाद लिया। अपनी बहू की इस उपलब्धि से सीताराम शर्मा भी अपने आंसू रोक न सके और उनका गला भर आया। यह आत्मीय व भावुक पल चुनाव में मिली बड़ी सफलता और पारिवारिक संस्कारों का खूबसूरत प्रतीक बन गया।
नवनिर्वाचित महापौर अनामिका शर्मा को 43 वोट मिले, जबकि चुनाव में भाजपा के 32 पार्षद ही जीते थे। इसके विपरीत अनामिका को 11 वोट ज्यादा मिले। कांग्रेस को महापौर पद के लिए महज चार वोट चाहिए थे। कांग्रेस खेमे के साथ रहे निर्दलीय प्रत्याशियों के अंदरखाने क्रॉस वोटिंग से इनकार नहीं किया जा सकता है।
चुनाव में भाजपा के 32 और कांग्रेस के 37 पार्षद जीते हैं। नियमानुसार बोर्ड बनाने के लिए 41 पार्षद चाहिए थे। लिहाजा दोनों ही दलों के लिए महापौर चुनाव अहम था। भाजपा ने बोर्ड बनाने के लिए जरूरी 41 का आंकड़ा पार करने के अलावा दो वोट ज्यादा हासिल किए। भाजपा की अंदरूनी रणनीति और घेराबंदी के आगे कांग्रेस कहीं नजर नहीं आई।
महापौर चुनाव भाजपा और कांग्रेस नेताओं के लिए अग्नि परीक्षा रही। विधायक अनिता भदेल, संभाग प्रभारी मोहनलाल गुप्ता, शहर भाजपा जिलाध्यक्ष रमेश सोनी सहित अन्य नेताओं ने मोर्चा संभाला। कम सीटें जीतने के बावजूद भाजपा मुकाबले में डटी रही।
नियमानुसार भाजपा और निर्दलीय पार्षदों को मतदान से पूर्व रिटर्निंग अधिकारी ने शपथ दिलाई। कांग्रेस के ज्यादातर पार्षद पहले ही शपथ ले चुके थे। नवनिर्वाचित महापौर अनामिका शर्मा, वार्ड 71 की पार्षद ऋतु रानी और वार्ड 7 के पार्षद विवेक सिंह 17 सितंबर को शपथ ले चुके थे।
चुनाव में 37 सीट जीतने के बावजूद कांग्रेस बोर्ड नहीं बना सकी। शहर कांग्रेस अध्यक्ष जयपाल, पूर्व आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़, पूर्व देहात कांग्रेस अध्यक्ष भूपेंद्र राठौड़, पूर्व नेता प्रतिपक्ष द्रोपदी कोली की रणनीति को भाजपा ने कहीं नहीं टिकने दिया।
साल 2015 में महापौर पद सामान्य पुरुष के लिए आरक्षित था। तब भाजपा के ही सुरेंद्र सिंह शेखावत ने भी नामांकन किया था। लेकिन सियासी तालमेल के चलते ओबीसी वर्ग के धर्मेंद्र गहलोत को महापौर बनाया गया। अनामिका शर्मा सामान्य वर्ग से पहली महापौर बनी हैं। उनसे पहले भाजपा की विद्या कमलाकर जोशी और सुरेंद्र सिंह शेखावत नगर परिषद के तीन-तीन माह सभापति रहे थे।
महापौर पद पर जीत के बाद भाजपाइयों ने नगर निगम के समक्ष पटाखे फोड़े। शहर जिलाध्यक्ष सोनी को कंधे पर बैठाकर निगम के दरवाजे तक ले गए।
भाजपा का बोर्ड बनाने और महापौर निर्वाचन तक विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का अहम योगदान रहा। उनकी अगुवाई में ही नगर निगम को साधने की रणनीति तैयार हुई। इसके चलते भाजपा 8 निर्दलीय और कांग्रेस समर्थित तीन पार्षदों को अपने पक्ष में कर पाई। खासतौर पर वार्ड 3 और 4 तो देवनानी के लिए प्रतिष्ठा के सवाल थे। उन्होंने ब्लॉक से लेकर मंडल तक नजर बनाए रखी। इसके बूते भाजपा ने बोर्ड बना लिया।
कांग्रेस की महिला पार्षद एक जैसी साड़ियां-सलवार सूट पहनकर पहुंचीं। पुरुष पार्षद सफेद शर्ट-टीशर्ट में दिखाई दिए। सुरक्षा के लिहाज से कांग्रेस के पार्षद और नेता बाउंसर भी साथ लेकर आए। कांग्रेस नेता भूपेंद्र राठौड़ सुबह कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल को लेकर पहुंचे। वह कार से निगम के गेट तक जाने लगे तो भाजपाइयों ने विरोध कर दिया। बाद में प्रत्याशी को ही जाने दिया गया।