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अजमेर सेवन वंडर्स विवाद: बड़ी मछलियों को अभयदान, बाद में आए इंजीनियर पर गिरी गाज

Ajmer Seven Wonders Controversy: एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि परियोजना को मंजूरी देने और इसकी मॉनिटरिंग करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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Mar 13, 2026
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सेवन वंडर्स। पत्रिका फाइल फोटो

अजमेर। अजमेर में करीब 12 करोड़ रुपए की लागत से बना सेवन वंडर्स प्रोजेक्ट अब सिर्फ विवादों में रह गया है। एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि परियोजना को मंजूरी देने और इसकी मॉनिटरिंग करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इसके उलट उस अभियंता को निलंबित कर दिया गया, जिसने इस परियोजना के पूरा होने के बाद कार्यभार संभाला था। अब इस पूरे मामले में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां तक कि विभाग की ओर से विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में स्मार्टसिटी लि. के अधिकारियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के नाम छिपाने का प्रयास किया गया। जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया गया।

आदेश में यह दिया हवाला

सेवन वंडर्स के अनियमित निर्माण संबंधी प्रकरण में गठित जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर प्रकरण में लापरवाही, नियमों की अवहेलना किए जाने संबंधी प्रकरण में तत्कालीन अभियंता नरेन्द्र अजमेरा को एपीओ करने के बाद अनुशासनिक कार्यवाही प्रस्तावित है।

सेवन वंडर्स बनने के बाद मिला कार्यभार

तत्कालीन जिला कलक्टर अंशदीप ने 1 मार्च 2023 को संशोधित आदेश जारी कर नगर निगम के अतिरिक्त मुख्य अभियंता नरेन्द्र अजमेरा को अतिरिक्त मुख्य अभियंता अजमेर स्मार्ट सिटी लि. के रिक्त पद पर कार्य करने के लिए अधिकृत किया। एक नवम्बर 2022 को ही अजमेर स्मार्टसिटी लि. के कार्यकारी अभियंता प्रदीप कुमार मौर्य ने अजमेर विकास प्राधिकरण के तत्कालीन कमिश्नर को सेवन वंडर्स का काम पूरा होने का हवाला देते हुए चार्ज हैंड ओवर करने के लिए पत्र जारी कर दिया था।

संशोधित स्वीकृति देने वालों के नाम गायब

सेवन वंडर्स परियोजना को लेकर विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से 19 फरवरी 2026 को स्वायत्त शासन विभाग को भेजे गए जवाब में यह स्वीकार किया गया है कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान परियोजना की राशि बढ़ाई गई और 18 अगस्त 2022 को 11.77 करोड़ रुपए की संशोधित प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी की गई।

टेंडर राशि कब-कब बढ़ाई गई और यह वृद्धि किसकी अनुशंसा पर की गई। हालांकि भेजे गए उत्तर में केवल बोर्ड बैठक की स्वीकृति का उल्लेख किया गया। संशोधित स्वीकृति देने वाले अधिकारियों के नाम शामिल नहीं किए गए। विभागीय नोटशीट में संशोधित तकनीकी स्वीकृति से संबंधित निर्णय और अनुमोदन का विवरण स्पष्ट रूप से दर्ज है। ऐसे में विधानसभा के प्रश्न के उत्तर में संबंधित अधिकारियों के नाम शामिल न होने को लेकर यह सवाल उठ रहे हैं।

Updated on:
13 Mar 2026 09:01 am
Published on:
13 Mar 2026 09:01 am