
अजमेर. अरावली पर्वतमाला पर औषधीय महत्व के पौधे घट रहे हैं। पौधे कम होने से इसका तापमान बढ़ रहा है। राज्य की 6838 खदानें इसको लगातार खोखला करने में जुटी है। परिणाम स्वरूप पिछले 10 साल में करीब 1 हजार से ज्यादा औषधीय पौधे रेड जोन में पहुंच गए हैं। अजमेर जिले में खरेखड़ी, हाथीखेड़ा, अजयसर, बोराज, किशनगढ़, पुष्कर, श्रीनगर, सावर क्षेत्र में खनन जारी है। राज्य में उदयपुर, राजसमंद, सिरोही, जयपुर, अलवर, सीकर, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर और अन्य जिलों में भी खनन हो रहा है। सेन्ट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) की 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार 1967-68 के बाद राज्य में अरावली का 35 प्रतिशत हिस्सा समाप्त हो गया है।
अरावली दुनिया में जैव विविधता की सबसे बड़ी संरक्षक है। अवैध खनन और वन क्षेत्र में अतिक्रमण से जैव विविधता को नुकसान हो रहा है।
पहाड़ी क्षेत्र में विलायती बबूल का फैलाव घातक साबित हो रहा। अरावली के 1 हजार औषधीय पौधे रेड जोन में हैं। यह पर्यावरण के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
- प्रो. मनोज यादव, बॉटनी विभाग एसपीसी-जीसीए
सलई, कुल्लू कुमच, गुग्गल, बरना, दूधी, खिरनी काला, इंद्र जौ, जंगल जलेबी, हरड़, पुनर्नवा, पाठा, और वज्रदंती
(स्रोत : मदस विश्वविद्यालय-सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय)