
ब्यावर के ऐतिहासिक मेले में ‘बादशाह’ बने चन्द्रशेखर अग्रवाल का गुरुवार को अंतिम संस्कार किया गया। जिस शख्स ने एक दिन पहले ही मेले में अपनी प्रजा पर दोनों हाथों से गुलाल रूपी खर्ची लुटाई थी, उसे अंतिम विदाई के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े। उनकी अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान ब्वावर शहर में व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखी।
चंद्रशेखर का विजयनगर रोड स्थित मुक्ति धाम में दोपहर 1 बजे अंतिम संस्कार किया गया। 14 साल के बेटे ने पिता को मुखाग्नि दी। इससे पहले उनके घर अंतिम दर्शन के लिए शव को रख गया। जहां पर ब्यावर कलक्टर, व्यापारियों सहित शहरभर के अनेक लोगों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और परिजनों को ढांढस बंधाया। इसके बाद घर से से मुक्तिधाम तक शव यात्रा निकाली गई। जहां पर चंद्रशेखर का रिति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
चन्द्रशेखर अग्रवाल के निधन के बाद ब्यावर जिला व्यापार संघ के अध्यक्ष संजय गिया ने व्यापारियों से बंद की अपील की। ऐसे में आज सुबह से ही अधिकतर जगहों पर दुकानें बंद रही। इससे पहले बुधवार को जिला प्रशासन ने जुलूस के मार्ग में निर्धारित सभी कार्यक्रम निरस्त कर दिए थे।
बता दें कि ‘बादशाह’ बने चन्द्रशेखर अग्रवाल ने बुधवार को अपनी प्रजा पर दोनों हाथों से गुलाल रूपी खर्ची लुटाते हुए हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था। हार्ट अटैक से उनके निधन की खबर से शहर में मातम पसर गया। जुलूस के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। जहां डॉक्टरों ने उनको सीपीआर देकर जान बचाने की कोशिश की, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। अजमेर रेफर करने से पहले चन्द्रशेखर की मौत हो गई थी।
चन्द्रशेखर अग्रवाल दूसरी बार बादशाह बने थे। इससे पहले भी बादशाह की निकली सवारी में चन्द्रशेखर अग्रवाल ही बादशाह बने थे। इस बार भी पूरे उत्साह से वे मेला में शामिल हुए।
ऐतिहासिक बादशाह मेले के दौरान जिला प्रशासन को फरमान सुनाने की परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है। इस वर्ष भी यह परंपरा निभाई गई, हालांकि बादशाह स्वयं फरमान नहीं सौंप सके। समिति सदस्यों ने यह फरमान जिला प्रशासन तक पहुंचाया। फरमान में शहर और जिले से जुड़े कई जमीनी मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। इसमें जिले के सबसे बड़े राजकीय अमृतकौर अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार तथा रिक्त पड़े चिकित्सकों के पद शीघ्र भरने की मांग की गई। शहर में पेयजल आपूर्ति को नियमित करने तथा जलापूर्ति का निश्चित समय तय करने को कहा गया। साथ ही बरसात के दौरान गली-मोहल्लों में जलभराव की समस्या से राहत दिलाने के लिए नदी-नालों की समयबद्ध सफाई करवाने पर जोर दिया गया।
फरमान में नगर परिषद की कार्यशैली में सुधार और प्रत्येक कार्य के लिए समय-सीमा निर्धारित करने का भी निर्देश है। युवाओं में बढ़ते स्मैक और अन्य मादक पदार्थों के सेवन पर चिंता जताते हुए पुलिस प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की गई। युवाओं के स्वर्णिम भविष्य के मद्देनजर स्पोर्ट्स अकादमी, स्टेडियम और आधुनिक रंगमंच के निर्माण का भी प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा हाथ ठेला सब्जी विक्रेताओं के लिए स्थान चिन्हित कर सुव्यवस्थित एवं सुगम व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की बात भी फरमान में शामिल है। बादशाह का यह फरमान शहर की मूलभूत समस्याओं और जनभावनाओं से जुड़ा हुआ है।