
सुप्रीम कोर्ट। पत्रिका फाइल फोटो
जयपुर। हाईकोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट भी पिछले साल तक खाली हो चुकी पंचायती राज संस्थाओं व शहरी निकायों के चुनाव के लिए 15 अप्रैल तक की डेडलाइन तय कर चुका, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग के चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं करने से चुनाव को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
इस बीच राजस्थान सरकार ने 113 शहरी निकायों में चुनाव टलवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में प्रक्रिया शुरू कर दी। वहीं, उस पर विरोध जताने के लिए शहरी निकाय चुनाव का मुद्दा कोर्ट तक ले जाने वाले पूर्व विधायक संयम लोढ़ा भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए है। लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की है, जिससे सरकार के आग्रह पर कोई निर्णय होने से पहले कोर्ट उनका भी पक्ष सुन ले।
पूर्व विधायक का आरोप है कि राजस्थान सरकार पिछले साल रिक्त हो चुकी शहरी निकायों के अब भी किसी न किसी तरह चुनाव टालना चाहती हैं। उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा जाएगा कि परिसीमन, पुनर्गठन अथवा ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के नाम पर चुनाव नहीं टाले जा सकते। ऐसे में अदालती निर्देशों की पालना में सरकार को तय समय सीमा तक चुनाव कराने का आग्रह किया जाएगा।
पिछले वर्ष खाली हो चुकी पंचायती राज संस्थाओं व शहरी निकायों के चुनाव 15 अप्रैल तक कराने के हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट दखल से इंकार कर चुका। हाल ही सरकार ने पंचायत चुनाव के मामले में तो अंडरटेकिंग देकर सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि 15 अप्रैल तक चुनाव कराने हैं, ऐसे में परिसीमन के मामलों में दखल नहीं किया जाए।
राज्य सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) में कहा है कि कोर्ट ने 309 में से 113 नगरीय निकायों का परिसीमन रद्द कर दिया। इन नगरीय निकायों की नए सिरे से प्रक्रिया पूरी करने के लिए चुनाव की समय बढ़ाई जाए। इन नगरीय निकायों में वार्डों की संख्या तो नहीं बदली, लेकिन आंतरिक सीमाओं को बदल दिया गया था।
Updated on:
05 Mar 2026 07:57 am
Published on:
05 Mar 2026 07:57 am
