
अजमेर.
ढोला-मारू की प्रेम गाथा के लिए मशहूर नरवर गांव को राज्यपाल का इंतजार है। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने गांव गोद लिया है। लेकिन तीन महीने से राज्यपाल का दौरा अटका हुआ है। अब वर्ष 2019 में ही राज्यपाल और आलाधिकारियों के गांव पहुंचने की उम्मीद है।
नरवर गांव को महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने गोद लिया है। यहां बीती 2 अगस्त को कुलाधिपति एवं राज्यपाल कल्याण सिंह का दौरा प्रस्तावित था। लेकिन तत्कालीन कुलपति प्रो. विजय श्रीमाली के निधन से राजभवन ने गांव का दौरा स्थगित कर दिया। इसके बाद से ना विश्वविद्यालय का दीक्षान्त ना गांव का दौरे का कार्यक्रम बन पाया है। अब विधानसभा चुनाव आचार संहिता लग चुकी है।
कराया था रंग-रोगन और मरम्मत
राज्यपाल के आगमन को देखते हुए विश्वविद्यालय ने गांव के माध्यमिक स्कूल और अन्य भवनों पर गुलाबी रंग कराया। यहां 5 हजार लीटर की पानी की टंकी रखवाई गई। गांव की उजाड़ वाटिका की चारदीवारी बनवाई गई। इसके अलावा कुछ अन्य कार्य भी कराए गए। दौरान स्थगित होने के बाद विश्वविद्यालय और राजभवन भी गांव को भूल चुके हैं।
यह है तालाब-बावड़ी के हाल
नरवर गांव में प्रवेश करते ही दांई ओर बूल्या तालाब बना हुआ है। कभी बबूल के पेड़ों की बहुतायत के चलते ही इसका नाम बूल्या तालाब पड़ा। 1975 में हुई अतिवृष्टि में यह तालाब अंतिम बार लबालब भरा था। इसके बाद तालाब में कभी पर्याप्त पानी नहीं रहा। तालाब में पानी आवक के स्त्रोतों पर कई जगह अतिक्रमण हो चुके हैं। किले की तरफ जाने वाली सडक़ पर एक तिल की बावड़ी बनी हुई है। इसमें कभी खूब पानी रहता थी। खभी राजा-रानी भी इसमें बैठकर चौपड़ खेलते थे। वक्त के साथ बावड़ी बर्बाद हो रही है।