
अजमेर। राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा के दौरान आरएसी के जवान नरेन्द्र गोदारा की गोली लगने से मौत के मामले में खुलासा हुआ है कि घटना के वक्त वह अपनी पत्नी से बात कर रहा था। तभी गोली चलने की आवाज आई। उसके बाद नरेन्द्र से बात बंद हो गई। महेन्द्रा ने मकान मालिक और अपने रिश्तेदारों को गोली चलने की सूचना दी। फिलहाल पुलिस मामले की पड़ताल में जुटी है। पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि 19 अक्टूबर शाम 5 बजे नागौर के मेड़ता रोड हाल भोपों का बाड़ा निवासी आरएसी का जवान नरेन्द्र गोदारा जब ड्यूटी पर पहुंचा तो शांत था और सबसे राम-राम करता हुआ अपने पाइंट पर पहुंचा। ड्यूटी ज्वाइन के बाद सवा 5 बजे पत्नी से मोबाइल फोन पर बात चल रही थी।
सम्भवत: बात करने के दौरान करीब सवा 5 बजे नरेन्द्र की सर्विस एसएलआर से फायर की आवाज आई। गोली की आवाज और नरेन्द्र से एकाएक बात बंद होते ही महेन्द्रा ने घटना की गम्भीरता को भांप लिया। उसने तत्काल रिश्तेदार और मकान मालिक को पति को गोली लगने की सूचना दी थी। पुलिस जांच में स्पष्ट होगा कि गोली चलने से ठीक पहले दम्पती के बीच क्या बातचीत हुई और घटना किन परिस्थितियों में हुई। पुलिस की पड़ताल अब नरेन्द्र की मौत से जुड़े घटनाक्रम में शाम सवा पांच बजे हुई आखिरी कॉल पर आकर टिक गई है। फोन पर बातचीत के दौरान क्या कहा गया और गोली कैसे चली, यह पूछताछ के बाद स्पष्ट हो सकेगा।
जानकारी के अनुसार, नरेन्द्र के पिता नाथूराम गोदारा का 2004 में निधन हो गया था। नरेन्द्र का बड़ा भाई रामनिवास गोदारा एयरफोर्स में है। वह ग्वालियर में तैनात है। नरेन्द्र ने साल 2021 में अपने दोस्त व बैचमेट हंसराज की बहन महेन्द्रा से परिजन की रजामंदी से विवाह किया था। दोनों खुशी-खुशी जीवन यापन कर रहे थे। उनके ग्यारह माह की पुत्री है। घटना किसी तनाव का नतीजा है या महज हादसा, यह अनुसंधान व पत्नी के बयान के बाद स्पष्ट हो सकेगा। हालांकि पुलिस घटना को हादसा मान रही है।
आदर्शनगर थाना पुलिस ने मंगलवार को जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में नरेन्द्र के शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया। सहायक आचार्या डॉ. वी.डी. बिजावत की अध्यक्षता में गठित बोर्ड ने पोस्टमार्टम की कार्रवाई से पहले शव का एक्स-रे कराया। मृतक का बड़ा भाई रामनिवास मौजूद रहा। पोस्टमार्टम में सामने आया कि गोली ठोड़ी से होते हुए खोपड़ी के पीछे के हिस्से से बाहर निकल गई।
जानकारी अनुसार नरेन्द्र की एसएलआर में दस राउंड लोड थे। लोडेड राइफल में दुर्घटनावश फायरिंग रोकने के लिए सेफ्टी मैकेनिज्म सेफ्टी कैच या चेंज लीवर होता है। नरेन्द्र की एसएलआर का लॉक बंद था या खुला यह भी बड़ा सवाल है।
पोस्टमार्टम के बाद जवाहरलाल नेहरू अस्पताल की मोर्चरी के बाहर आरएसी 9 बटालियन के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेशचन्द मीणा, सीओ मुकेश चौधरी ने पुष्पमाला अर्पित की। साथी जवानों ने भी सलामी दी। आरएसी के जवान शव को सरकारी वाहन में नरेन्द्र के पैतृक गांव मेड़ता रोड ले गए।
पॉलिटेक्निक कॉलेज में घटनास्थल पर सीसीटीवी फुटेज नहीं मिले। मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम कराया है। आखिर मर्तबा किससे बात हुई, क्या बात हुई। इन तमाम सवालों पर अनुसंधान किया जा रहा है।
-ओमप्रकाश मीणा, थानाप्रभारी आदर्शनगर