अजमेर

राजस्थान का नसीराबाद शहर देशभर में ट्रेलर-ट्रॉली निर्माण के लिए क्यों है मशहूर? जानिए कैसे हुई उद्योग की शुरुआत

राजस्थान का नसीराबाद शहर देशभर में ट्रेलर-ट्रॉली निर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। यहां 250 से अधिक निर्माण इकाइयों में ट्रेलर-ट्रॉलियां तैयार की जाती हैं, जिनकी सप्लाई कई राज्यों में होती है।
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Jul 17, 2026
Nasirabad Rajasthan Trailer Trolley Industry
नसीराबाद में राष्ट्रीय राजमार्ग के पास सटे क्षेत्र मे इकाइयों में खड़े ट्रेलर-ट्रॉली। Photo- Patrika

अजमेर। राजस्थान के अजमेर जिले के नसीराबाद की ट्रेलर-ट्रॉली निर्माण उद्योग के कारण प्रदेश ही नहीं देशभर में अपनी अलग पहचान है। अलग-अलग राज्यों से मांग पर ट्रेलर एवं ट्रॉलियां तैयार की जा रही है। इस उद्योग से हजारों परिवारों को जहां रोजगार मिल रहा है, वहीं जिले के राजस्व में भी भूमिका है। करीब 250 से अधिक इकाइयां, फैक्ट्री में ट्रेलर, ट्रकों की बॉडी का निर्माण हो रहा है।

नसीराबाद में अस्सी के दशक से इस कार्य ने रफ्तार पकड़ना शुरू किया। अब राजस्थान के सबसे बड़े ट्रेलर-ट्रॉली निर्माण केंद्रों में नसीराबाद गिना जाता है। नसीराबाद में औद्योगिक क्षेत्र के रूप में राष्ट्रीय राजमार्ग से भाग में लगातार इकाइयां बढ़़ रही है। उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से सुविधाओं के विस्तार की जरूरत है। वहीं इस उद्योग से जुड़े लोगों की समस्याओं का समाधान भी आवश्यक है।

4 हजार टन लोहे की खपत नसीराबाद में

नसीराबाद में ट्रेलर-ट्रॉली का निर्माण करते कारीगर। पत्रिका

नसीराबाद विधानसभा क्षेत्र में प्रतिमाह करीब 4 हजार टन लोहा अजमेर, पंजाब, गोविंदगढ़ मंडी, जयपुर और भीलवाड़ा सहित अन्य जगहों सप्लाई हो रहा है। इसी लोहे से मजबूत ट्रेलर-ट्रॉलियां तैयार कर राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश सहित कई राज्यों में भेजी जाती हैं।

उद्योग की शुरुआत वर्ष 1985 में हुई

हाजी असलम मिर्जा ने राजस्थान की पहली ट्रेलर-ट्रॉली का निर्माण 1985 में किया। उनकी शुरुआत सिकंदरा मिर्जा इंजीनियरिंग वर्कशॉप से हुई थी। उन्होंने बताया कि 32 फीट की एक ट्रॉली के निर्माण में औसतन 3 से 4 टन लोहा लगता है, एवं 40 फीट ट्राली में औसतन 6 से 7 टन लोहा उपयोग होता है।

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इन कारीगरों को मिलता है काम

लोहा कटिंग, फैब्रिकेशन, वेल्डिंग, एक्सल फिटिंग, वायरिंग, टायर फिटिंग, पेंटिंग और फिनिशिंग सहित पूरी प्रक्रिया में करीब 15 कारीगर काम करते हैं और लगभग आठ दिन में एक ट्रॉली तैयार होती है। एक इकाई (वर्कशाप) में हर माह औसतन 3 से 4 ट्रॉलियां तैयार की जाती हैं। इस प्रकार प्रतिमाह सैकड़ों ट्रेलर-ट्रॉलियां नसीराबाद से तैयार होकर देशभर में पहुंच रही हैं।

यह कारण रहा केबिन से ट्रॉली के व्यापार में बढ़ोतरी होना

नसीराबाद में ट्रेलर-ट्रॉली का निर्माण करते कारीगर। पत्रिका

एक समय था जब देशभर की वाहन कंपनियों के चेसिस बिना केबिन के नसीराबाद आते थे और यहां लकड़ी, लोहा तथा एल्युमीनियम से ट्रक बॉडी और केबिन तैयार की जाती थी। इस काम से हजारों लोगों को रोजगार मिलता था। लेकिन कंपनियों ने फैक्ट्री-फिट केबिन वाले ट्रक बाजार में उतारने शुरू किए तो स्थानीय ट्रक बॉडी निर्माण का काम लगभग समाप्त हो गया। इसके बाद नसीराबाद के उद्यमियों ने ट्रेलर-ट्रॉली निर्माण को अपनाया और आज यही उद्योग शहर की नई पहचान बन गया है।

Updated on:
17 Jul 2026 06:28 pm
Published on:
17 Jul 2026 06:24 pm