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Patrika Expose: एक मरीज के 39 एक्स-रे ने खोली सिस्टम की पोल, 35 साल के अनुभवी रेडियोग्राफर भी हैरान

Patrika Investigation: सरकारी अस्पतालों में एक्स-रे जांच के नाम पर गंभीर अनियमितता सामने आई है। जवाहरलाल नेहरू अस्पताल की आपातकालीन इकाई में एक मरीज के नाम पर एक साथ 39 एक्स-रे दर्ज मिले। पत्रिका की पड़ताल में कई अन्य मरीजों के नाम पर भी 10 से 20 एक्स-रे लिखे जाने के मामले सामने आए हैं।
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अजमेर

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Anil Prajapat

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चन्द्र प्रकाश जोशी

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Updated: 18 Jul 2026, 1:48 PM IST

JLN Hospital Ajmer

जेएलएन अस्पताल अजमेर। फोटो: पत्रिका

अजमेर। सरकारी अस्पतालों में एक्स-रे जांच के नाम पर गंभीर अनियमितता सामने आई है। जवाहरलाल नेहरू अस्पताल की आपातकालीन इकाई में एक मरीज के नाम पर एक साथ 39 एक्स-रे दर्ज मिले। पत्रिका की पड़ताल में कई अन्य मरीजों के नाम पर भी 10 से 20 एक्स-रे लिखे जाने के मामले सामने आए हैं। एक साथ अत्यधिक एक्स-रे करने के दौरान न तो तकनीशियन ने उच्चाधिकारियों से संपर्क किया न कोई जानकारी दी गई। जब एक्स-रे फिल्म की खपत एवं एक्स-रे जांचों की जानकारी की गई तो पर्चियां सामने आई।

आपातकालीन इकाई में जांच के लिए निर्धारित प्रिंटेड स्लिप होने के बावजूद सामान्य कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर एक्स-रे लिखे जा रहे हैं। जबकि अजमेर अस्पताल प्रशासन ने प्रिंटेड स्लिप हर ओपीडी, आपातकालीन इकाई में चिकित्सकों की टेबल व विभागों में रखवाई हुई है। अधिकांश पर्चियों पर न चिकित्सक के हस्ताक्षर है, न सील और न ही निर्धारित प्रारूप का पालन किया गया है।

35 साल की नौकरी में कभी ऐसे मामले सामने नहीं आए

रेडियोग्राफर रामकिशोर मीणा के अनुसार उनकी 35 साल की नौकरी में कभी ऐसे एक्स-रे के मामले सामने नहीं आए। मैंने भी एक्सीडेंट केस में ज्यादा से ज्यादा किसी मरीज के तीन-चार एक्स-रे एक साथ किए होंगे। अब तो मरीज खुद चिकित्सक से परामर्श के समय खुद एक्स-रे जांच लिखने का आग्रह कर देते हैं। पर्ची से ना तो चिकित्सक का पता चलता है ना जिम्मेदार का।

केवल नाम, अन्य ब्योरा भी नहीं

पत्रिका पडताल में 34 वर्षीय रामलाल के नाम पर एक साथ 39 एक्स-रे दर्ज मिले। सामान्य परिस्थितियों में किसी मरीज के इतने एक्स-रे की जरूरत नहीं होती। जब अस्पताल प्रशासन से मरीज की अन्य डिटेल लेने का प्रयास किया तो कोई जानकारी नहीं मिली। मरीज का मोबाइल नम्बर भी अंकित नहीं है।

फिल्म की खपत पर भी सवाल

आपातकालीन एक्स-रे कक्ष में प्रतिदिन 300 से 400 एक्स-रे होते हैं। प्रति फिल्म की लागत करीब 35 रुपए है। इस हिसाब से हर महीने लाखों रुपए की एक्स-रे फिल्मों की खपत होती है। ऐसे में एक मरीज के नाम पर 39 एक्स-रे दर्ज होने जैसे मामलों ने फिल्म की खपत और रिकॉर्ड की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं यह भी आशंका है कि कहीं फिल्म की खपत में गड़बड़ी तो नहीं हो रही।

अन्य केस में भी 20 एक्स-रे

पड़ताल में अन्य केस भी सामने आए, जिनमें मरीज दीपक (21) के एक साथ 12 एक्स-रे किए गए। एक 38 वर्षीय मरीज के एक साथ 19 एक्स-रे जांच की गई। वहीं किसी में 16 को किसी में 14 एक्स-रे एक साथ किए गए।

पाबंद किया, जांच जारी

रेडियोग्राफी, ऑर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष, आपातकालीन इकाई व एक्स-रे इंचार्ज को पत्र लिखा है। पर्ची पर एक्स-रे नहीं लिखने को पाबंद किया है।
-डॉ. अरविन्द खरे, अधीक्षक, जेएलएन अस्पताल अजमेर