प्रयागराज

धर्म परिवर्तन मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बेटियों को कैद रखना बताया स्वतंत्रता का उल्लंघन

Uttar Pradesh News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्म परिवर्तन करने वाली दो बालिग बहनों को घर में रोककर रखने को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन माना। कोर्ट ने उन्हें अपनी पसंद से रहने की आजादी दी और पिता व यूपी सरकार को संयुक्त रूप से 25 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
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Aug 11, 2026
Allahabad High Court Live-in Relationship, Allahabad High Court live-in case
इलाहाबाद हाईकोर्ट का लिव-इन रिलेशनशिप पर फैसला | फोटो सोर्स- patrika.com

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले में बालिग बेटियों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि बालिग व्यक्ति को अपनी आस्था, धर्म, रहने की जगह और जीवन से जुड़े फैसले खुद लेने का अधिकार है। जस्टिस संदीप जैन की एकल पीठ ने आगरा की धर्म परिवर्तन करने वाली दो सगी बहनों को पिता की ओर से घर में रोककर रखने को उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन माना। कोर्ट ने दोनों बहनों को अपनी पसंद के स्थान और व्यक्ति के साथ रहने की आजादी दी है। साथ ही पिता और प्रदेश सरकार को संयुक्त रूप से 25 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

पिता और सरकार को देना होगा 25 लाख का मुआवजा

हाईकोर्ट ने बहनों को घर में रोककर रखने को उनकी स्वतंत्रता का उल्लंघन माना। कोर्ट ने इस मामले में पिता और उत्तर प्रदेश सरकार को संयुक्त रूप से दोनों बहनों को 25 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर दोनों बहनों को पेश किया था। बहनों ने अदालत को बताया कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म अपनाया है। उनका आरोप था कि धर्म परिवर्तन के फैसले से नाराज माता-पिता ने उन्हें जबरन घर में रोक रखा था।

बहनों ने लगाया जबरन रोकने का आरोप

आगरा निवासी दोनों बहनों ने अपनी याचिका में कहा था कि उन्होंने अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन किया है, लेकिन परिवार उनके फैसले से सहमत नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बाहर जाने और अपनी पसंद के अनुसार जीवन जीने की अनुमति नहीं दी गई। एक बहन ने अदालत को बताया कि वह 35 साल की है और उसने जूलॉजी में एमएससी, एमफिल और बीएड की पढ़ाई की है। उसने कहा कि धर्म परिवर्तन का फैसला उसने मानसिक शांति के लिए लिया था।

कोर्ट ने मानी बालिगों की स्वतंत्रता

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि बालिग व्यक्ति को अपने धर्म, निवास और जीवन से जुड़े फैसले लेने की पूरी आजादी है। किसी भी व्यक्ति को केवल परिवार की असहमति के कारण उसकी इच्छा के खिलाफ नहीं रखा जा सकता। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद दोनों बहनों को अपनी पसंद के अनुसार जीवन जीने की अनुमति मिल गई।

Updated on:
11 Aug 2026 07:57 am
Published on:
11 Aug 2026 07:57 am