
अलवर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। अरावली विहार थाने में तैनात एएसआई शंकर लाल शर्मा ने कानून की रक्षा करने के बजाय रिश्वतखोरी का रास्ता चुना, जिसके बाद एसीबी ने जाल बिछाकर उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। जानकारी के अनुसार एक परिवादी ने एसीबी की अलवर चौकी में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में बताया गया कि उसके बेटे के खिलाफ अरावली विहार थाने में एक मुकदमा दर्ज है। इस मामले के जांच अधिकारी एएसआई शंकर लाल शर्मा थे। आरोपी एएसआई मुकदमे से पीड़ित के बेटे का नाम निकालने, पुलिस हिरासत में उसके साथ मारपीट नहीं करने और केस में मदद करने के नाम पर परिवार को लगातार परेशान कर रहा था और बदले में 25,000 रुपये की रिश्वत मांग रहा था।
शिकायत के मुताबिक आरोपी एएसआई 13 जुलाई की सुबह खुद पीड़ित के घर पहुंच गया था। वहां उसने परिवादी और सह-परिवादी पर दबाव बनाकर 5,000 रुपये वसूल लिए और धमकी दी कि बाकी के 20,000 रुपये शाम तक लेकर थाने आ जाना। इसके तुरंत बाद पीड़ित ने एसीबी का दरवाजा खटखटाया।
एसीबी अलवर प्रथम के प्रभारी और उप अधीक्षक शब्बीर खान की टीम ने जब शिकायत का गोपनीय सत्यापन करवाया, तो शिकायत बिल्कुल सही पाई गई। सत्यापन के दौरान भी आरोपी ने 10,000 रुपये ले लिए थे और बाकी के 10,000 रुपये की मांग पर अड़ा हुआ था।
उप महानिरीक्षक पुलिस-प्रथम डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन में मंगलवार को एसीबी की टीम ने जाल बिछाया। जैसे ही सह-परिवादी ने आरोपी एएसआई शंकर लाल शर्मा को रिश्वत के बाकी 10,000 रुपये थमाए, तो एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस स्मिता श्रीवास्तव और महानिरीक्षक (IG) एस. परिमला के सुपरविजन में आरोपी एएसआई से पूछताछ की जा रही है और उसके ठिकानों की तलाशी ली जा रही है।
एसीबी इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। ब्यूरो ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत मांगता है, तो वे तुरंत एसीबी के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1064 या व्हाट्सएप नंबर 9413502834 पर शिकायत दर्ज कराएं।