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Alwar News: अलवर के कलाकार की अद्भुत कला: रद्दी अखबार से बनाया भगवान जगन्नाथ का भव्य रथ

अलवर के हस्तशिल्प कलाकार शेखर चंद प्रजापति ने रद्दी अखबार से भगवान जगन्नाथ के रथ की सुंदर प्रतिमूर्ति बनाई है। बिना लकड़ी या लोहे के बना यह रथ श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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Jul 22, 2026
alwar artist shekhar chand prajapati
शेखर चंद प्रजापति (फोटो - पत्रिका)

ऐतिहासिक जगन्नाथ मेले और रथयात्रा के पावन अवसर पर अलवर शहर के टेल्को चौराहा निवासी हस्तशिल्प कलाकार शेखर चंद प्रजापति ने अपनी श्रद्धा और अनूठी हस्तकला का एक अद्भुत नजारा पेश किया है। शेखर ने 'वेस्ट टू बेस्ट' यानी कचरे से बेहतरीन सामान बनाने के विचार को बढ़ावा देते हुए घरों में बेकार पड़े पुराने अखबारों की रद्दी का बहुत ही रचनात्मक उपयोग किया है। उन्होंने बिना किसी लकड़ी, तार या धातु के इस्तेमाल के केवल रद्दी पेपर से भगवान जगन्नाथ के रथ की एक अत्यंत सुंदर और हूबहू प्रतिमूर्ति तैयार कर दिखाई है।

एक महीने की कड़ी मेहनत और बिना लकड़ी-तार का अनोखा मॉडल

बीएससी-बीएड करने के बाद एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले शेखर चंद प्रजापति ने बताया कि उन्हें बचपन से ही क्राफ्ट्स और नई-नई कलाकृतियां बनाने का बहुत शौक रहा है। भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी आस्था को प्रकट करने के लिए उन्होंने इस सुंदर मॉडल को बनाने का फैसला किया। इस बारीक और जटिल कलाकृति को पूरा करने में उन्हें एक महीने का लंबा समय लगा।


इस रथ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के लोहे, कील, तार, लकड़ी या भारी मेटल का प्रयोग बिल्कुल नहीं किया गया है। उन्होंने अखबार के पन्नों को बहुत ही कुशलता से मोड़कर, रोल करके और फेविकोल से जोड़कर इसे पूरी मजबूती दी है। आकार की बात करें तो इस रथ मॉडल की लंबाई 20 इंच, चौड़ाई 10 इंच और ऊंचाई 17.5 इंच है। इसे पहली नजर में देखकर कोई भी अंदाजा नहीं लगा सकता कि यह सिर्फ कागजों से बना है।

जगन्नाथ मंदिर को भेंट की यह अनोखी कृति

अपनी इस अनोखी कलाकृति के बारे में बात करते हुए शेखर ने बताया कि कि उनकी इस रथ मॉडल को बेचने या व्यावसायिक इस्तेमाल करने की कोई मंशा नहीं है। उन्होंने रथयात्रा के पावन दिन पर बुधवार को सुभाष चौक स्थित जगन्नाथ महाराज मंदिर प्रशासन और मेला समिति को यह मॉडल भगवान के चरणों में भेंट किया है, ताकि मंदिर आने वाले सभी भक्त इसे देखकर आनंदित हो सकें। इसके साथ ही शेखर ने स्थानीय प्रशासन और मीडिया से अलवर के जमीनी हस्तशिल्प कलाकारों को प्रोत्साहन देने की अपील भी की है।

कागज से तैयार इंद्र विमान मंदिर को भेंट किया गया (फोटो - पत्रिका)


दिल्ली में रहने वाले नेशनल अवार्डी फूफाजी से मिली प्रेरणा

शेखर को यह कला विरासत और पारिवारिक माहौल से सीखने को मिली है। उनके फूफाजी टेराकोटा के प्रसिद्ध कलाकार हैं और राष्ट्रीय पुरस्कार (नेशनल अवॉर्ड) से सम्मानित हो चुके हैं। उन्हीं से प्रेरणा लेकर शेखर ने अपनी इस कला को निखारा है। अपनी प्राइवेट जॉब के साथ-साथ वे अपनी कला को पूरा समय देते हैं। इससे पहले भी वे अखबार और 3D पेपर आर्ट तकनीक से इंद्र विमान, राजस्थान रॉयल्स की थीम और ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसे कई बारीक और सुंदर मॉडल्स सफलतापूर्वक बना चुके हैं।

Updated on:
22 Jul 2026 03:34 pm
Published on:
22 Jul 2026 03:34 pm