22 जुलाई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

epaper_icon

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

Alwar News: अलवर में ग्रीन बेल्ट भूमि पर पट्टा रद्द, हाईकोर्ट ने दिया जांच का आदेश

हाईकोर्ट ने अलवर के ‘दीवान जी का बाग’ स्थित ग्रीन बेल्ट की जमीन पर जारी पट्टा रद्द करने के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि मास्टर प्लान में दर्ज ग्रीन बेल्ट का आवासीय उपयोग गैरकानूनी है। साथ ही दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
2 min read
Google source verification
alwar diwan ji ka bagh

representative picture (AI)

हाईकोर्ट ने अलवर के दीवान जी का बाग क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट के लिए आरक्षित भूमि पर जारी पट्टा रद्द करने की कार्रवाई को वैध ठहराया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट के रूप में चिन्हित भूमि का आवासीय उपयोग किसी भी स्थिति में वैध नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने के निर्देश देते हुए तीन माह के भीतर पालना रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। इस फैसले को शहर में ग्रीन बेल्ट संरक्षण और नियोजन नियमों के प्रभावी पालन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गलत तथ्यों के आधार पर जारी हुआ

न्यायाधीश आनंद शर्मा ने विकास मोदी की याचिका खारिज करते यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने अलवर नगर निगम के पट्टा निरस्त करने एवं स्वायत्त शासन विभाग के भू-राजस्व अधिनियम की धारा 90-ए के तहत की गई कार्यवाही को शून्य घोषित करने के आदेश को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि उन्होंने भूमि सभी राजस्व अभिलेखों, धारा 90-ए की कार्यवाही और नगर निगम द्वारा जारी पट्टे के आधार पर खरीदी, इसलिए वे बोनाफाइड खरीदार हैं।

राज्य सरकार और नगर निगम अलवर की ओर से अधिवक्ता अजय शुक्ला ने कहा कि संबंधित भूमि मास्टर प्लान-2031 में ग्रीन बेल्ट/ग्रीन एरिया दर्ज है,ऐसी स्थिति में भूमि का आवासीय उपयोग या नियमन कानून के विपरीत है। नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 73-बी के तहत यदि कोई पट्टा कानून के विरुद्ध या गलत तथ्यों के आधार पर जारी हुआ हो तो उसे निरस्त किया जा सकता है।


स्थानीय निकायों के लिए अनिवार्य

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देने से इनकार कर दिया, वहीं स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख सचिव और कार्मिक सचिव को जिम्मेदार अधिकारियों का पता लगाकर उनके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि मास्टर प्लान केवल नीतिगत दस्तावेज नहीं, बल्कि वैधानिक प्रभाव वाला दस्तावेज है, जिसका पालन सभी सरकारी और स्थानीय निकायों के लिए अनिवार्य है।

ग्रीन बेल्ट का उर्द्दश्य पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना और अनियंत्रित शहरी विस्तार रोकना है। ऐसे क्षेत्र में आवासीय या व्यावसायिक उपयोग की अनुमति देना नियोजन कानूनों की मूल भावना के विपरीत है। साथ ही कहा कि संविधान के अनुच्छेद 300-ए के तहत संपत्ति का अधिकार केवल वैध रूप से अर्जित अधिकारों की रक्षा करता है। यदि कोई अधिकार कानून के उल्लंघन से उत्पन्न हुआ है तो उसे संवैधानिक संरक्षण नहीं मिल सकता।