
साइबर ठगी के मामले में अदालत ने अहम टिप्पणी की है। राजस्थान का अलवर जिला साइबर ठगी के मामले में सुर्ख़ियों में बना रहता है। अलवर सेशन न्यायाधीश अनंत भण्डारी की अदालत ने साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तार रामगढ़ थाना क्षेत्र के पिपरोली निवासी उन्नस खान की जमानत याचिका खारिज कर दी।
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश भंडारी ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि "अलवर क्षेत्र विगत कुछ समय से राष्ट्रीय स्तर पर साइबर अपराध के लिए कुख्यात रहा है। क्षेत्र विशेष में साइबर अपराध का सेंटर बनने संबंधी खबरें विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में सामने आती रही हैं। यदि ऐसे मामलों में जमानत दी जाती है तो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ठगी के मामलों को बढ़ावा मिलेगा तथा समाज में न्यायालयों के प्रति अविश्वास की भावना बढ़ेगी।"
संदिग्ध बैंक खातों की जांच के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रामगढ़ ब्रांच के एक खाते में लेयर-01 के तहत 10 हजार 432 रुपए 60 पैसे तथा लेयर-02 के तहत 5 हजार रुपए के संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिले थे। इस खाते के संबंध में 1930 साइबर हेल्पलाइन पोर्टल पर दो शिकायतें दर्ज थीं। इसके बाद रामगढ़ थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2), 318(4) तथा आइटी एक्ट की धारा 66-सी और 66-डी में एफआइआर दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया। इस दौरान पुलिस ने 26 जून को आरोपी उन्नस खान को गिरफ्तार कर लिया था।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है, उसके खाते में आई राशि वापस लौटा दी गई है और उसका साइबर अपराध से कोई संबंध नहीं है। वहीं, लोक अभियोजक ने दलील दी कि आरोपी के खाते में साइबर अपराध से संबंधित राशि आई है, उसके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं और ऐसे अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, इसलिए जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
केस डायरी के अनुसार आरोपी के खिलाफ पहले से तीन आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, जिनमें एक हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराध से संबंधित है। अदालत ने यह भी माना कि प्रथम दृष्टया महाराष्ट्र से आरोपी के खाते में सीधे संदिग्ध राशि आई और दो लेयर में ट्रांजेक्शन होना रिकॉर्ड पर है, जिससे साइबर अपराध में उसकी संलिप्तता प्रथम दृष्टया परिलक्षित होती है।