
Cyber Crime: आजकल ऑनलाइन ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन ठगों के पीछे कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो इन्हें बैंक खाते किराए पर देते हैं? अलवर पुलिस ने ऐसे ही तीन आरोपियों को दबोचा है जो सीधे तौर पर साइबर अपराधियों की मदद कर रहे थे। पुलिस ने अलग-अलग थानों में तीन केस दर्ज कर इन आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड, एक एटीएम कार्ड और एक चेक बुक जब्त की है।
अलवर के एसपी सुधीर चौधरी ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि अरावली विहार, नौगावां और लक्ष्मणगढ़ थाना पुलिस ने मिलकर इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान 21 साल के यांशु सैनी, 20 साल के गोविंदा और 21 साल के मुजाईद खान के रूप में हुई है। ये सभी उम्र में भले ही कम हैं, लेकिन इनके कारनामे बेहद शातिर हैं। फिलहाल तीनों से अलग-अलग मामलों में पूछताछ की जा रही है।
साइबर अपराध की भाषा में जिन खातों का इस्तेमाल ठगी का पैसा मंगाने और छिपाने के लिए किया जाता है, उन्हें 'म्यूल अकाउंट' कहते हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये तीनों आरोपी साइबर ठगों के लिए नए-नए बैंक खाते खुलवाते थे और उन्हें खुद ऑपरेट करते थे। जब भी ठग किसी आम इंसान से ऑनलाइन धोखाधड़ी करते थे, तो वे ठगी की रकम सीधे इन्हीं खातों में ट्रांसफर करवाते थे। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि मुख्य अपराधियों की असली पहचान और लोकेशन पुलिस की नजरों से छिपी रहे।
पुलिस के मुताबिक ये आरोपी ठगी के पैसों को बैंक खातों, गूगल पे (Google Pay) और फोनपे (PhonePe) जैसे डिजिटल पेमेंट ऐप्स के जरिए इधर से उधर ट्रांसफर करते थे। जैसे ही पैसा खाते में आता, ये अपना तय कमीशन काट लेते थे और बाकी की मोटी रकम कैश निकालकर या डिजिटल तरीके से मुख्य साइबर ठगों तक पहुंचा देते थे। इस तरह ये आरोपी अपराधियों के काले धन को सफेद करने और उनके लेन-देन को आसान बनाने का काम कर रहे थे। पुलिस अब इस बात का पता लगा रही है कि इन्होंने अब तक कितने लोगों के खाते ठगों को बेचे हैं।