अलवर

अलवर जिला अस्पताल: SDP मशीन बंद, 11 हजार में प्लेटलेट्स खरीदने को मजबूर मरीज

अलवर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। ब्लड बैंक की सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (SDP) मशीन पिछले एक हफ्ते से बंद पड़ी है, जिससे गंभीर मरीज बेबस हैं। बैकअप सिस्टम खराब होने और लैब मशीनों के इंस्टॉलेशन में कागजी अड़ंगों के चलते मरीजों को भारी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
2 min read
• •
Oct 08, 2026
alwar district hospital
अस्पताल की सेंट्रल लैब में रखी सीरम इलेक्ट्रोलाइट की जांच मशीन (फोटो - पत्रिका)

अलवर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (SDP) की मशीन पिछले एक सप्ताह से बंद है। बिजली जाने के बाद मशीन को समय पर बैकअप नहीं मिलने से प्रक्रिया रुक जाती है। इससे कैंसर, डेंगू, स्क्रब टाइफस और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मरीजों को परेशानी हो रही है।

ब्लड बैंक में एसडीपी (Single Donor Platelets) की सुविधा मरीजों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। मशीन बंद होने से जरूरतमंद मरीजों को निजी संस्थानों से एसडीपी खरीदनी पड़ रही है। वहां इसके लिए करीब 11 हजार रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद मशीन बंद रहने से मरीजों और उनके परिजनों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार एक एसडीपी से मरीज के शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या करीब 40 से 50 हजार तक बढ़ सकती है। डेंगू और अन्य बीमारियों में जब प्लेटलेट्स तेजी से कम होते हैं, तब इसकी जरूरत पड़ सकती है। कैंसर के मरीजों और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के कुछ मामलों में भी डॉक्टर एसडीपी की सलाह देते हैं।

बिजली बैकअप की व्यवस्था भी खराब

मशीन के बंद होने की मुख्य वजह बिजली आपूर्ति के दौरान पर्याप्त बैकअप नहीं मिलना बताई जा रही है। अस्पताल में जनरेटर तो है, लेकिन उसका ऑटो स्टार्ट सिस्टम करीब एक साल से खराब है। ऐसे में बिजली जाने पर जनरेटर अपने आप शुरू नहीं होता। वहीं ब्लड बैंक का यूपीएस भी खराब बताया जा रहा है।

एसडीपी तैयार करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली एक किट की कीमत करीब 7 से 8 हजार रुपए है। बिजली बाधित होने से प्रक्रिया बीच में रुकने पर किट खराब होने का खतरा रहता है। ऐसे में अस्पताल में मशीन के संचालन के लिए निर्बाध बिजली व्यवस्था जरूरी है।

इलेक्ट्रोलाइट मशीन भी छह महीने से खराब

अलवर जिला अस्पताल की सेंट्रल लैब में सीरम इलेक्ट्रोलाइट जांच की मशीन भी करीब छह महीने से खराब है। केटीपीएल कंपनी ने मौजूदा मशीन को कंडम घोषित कर दिया है। मरीजों की निशुल्क जांच प्रभावित नहीं हो, इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने निजी संस्थान से जांच कराने का अनुबंध किया है।

लैब के लिए दो नई इलेक्ट्रोलाइट मशीनें अस्पताल में आ चुकी हैं, लेकिन उनका इंस्टॉलेशन अभी तक नहीं हो सका है। खरीद आदेश में मशीन का मेक और मॉडल दर्ज नहीं होने के साथ तकनीकी मंजूरी की प्रक्रिया भी अटकी हुई है। संबंधित चिकित्सक की तकनीकी स्वीकृति नहीं होने से मशीन को जरूरत के अनुसार उपयुक्त मानने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है।

अस्पताल के पूर्व आदेश के अनुसार एक लाख रुपए तक के उपकरण के लिए बायोमेडिकल इंजीनियर और इससे अधिक कीमत के उपकरण के लिए संबंधित विभागाध्यक्ष की मंजूरी का प्रावधान है। वहीं 50 हजार रुपए तक के उपकरण तीन कोटेशन के आधार पर खरीदे जा सकते हैं। इन प्रक्रियाओं के बीच नई मशीनें आने के बावजूद मरीजों को उनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

Updated on:
08 Oct 2026 11:30 am
Published on:
08 Oct 2026 11:30 am