अलवर

Alwar: सरकारी स्कूलों में खेल मैदान नहीं, प्रतिभाएं कैसे बनेंगी खिलाड़ी?

अलवर के सरकारी स्कूलों में खेल प्रतिभाओं की भरमार है, लेकिन मैदान और संसाधनों की कमी उनके सपनों पर भारी पड़ रही है। बॉक्सिंग, तैराकी और तीरंदाजी जैसे खेलों के लिए स्कूलों में जमीन तक नहीं है।
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Sep 24, 2026
alwar government schools
representative picture (AI)

अलवर के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें तराशने के लिए मैदान और संसाधनों का अभाव है। जिले के सरकारी स्कूलों में तैराकी, बॉक्सिंग, तीरंदाजी, जिम्नास्टिक और स्केटिंग जैसे खेलों के लिए न तो निर्धारित मैदान हैं और न ही नियमित अभ्यास की पर्याप्त सुविधाएं।

नियमित प्रशिक्षण लेना मुश्किल

इसके बावजूद शिक्षा विभाग हर साल इन खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित करता है। प्रतियोगिताओं के दौरान मैदान और अन्य संसाधनों के लिए निजी स्कूलों, खेल संस्थानों या दूसरे उपलब्ध स्थानों का सहारा लेना पड़ता है। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्र और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों पर पड़ता है।

जिन बच्चों के परिवार निजी अकादमी या क्लब की फीस वहन नहीं कर सकते, उनके लिए इन खेलों में नियमित प्रशिक्षण लेना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में प्रतिभा होने के बावजूद विद्यार्थी प्रतियोगिता के स्तर तक पहुंचने से पहले ही पीछे रह जाते हैं। वहीं निजी स्कूलों अथवा निजी स्तर पर प्रशिक्षण लेने वाले विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास का अवसर मिल जाता है।

प्रतियोगिता के समय याद आते हैं मैदान

स्कूली खेल कैलेंडर में विभिन्न खेलों को शामिल किया जाता है, लेकिन कई खेलों के लिए सरकारी स्कूलों में स्थायी आधारभूत ढांचा विकसित नहीं हुआ है। प्रतियोगिता की मेजबानी मिलने पर मैदान की तलाश शुरू होती है। कई बार निजी स्कूलों या अन्य संस्थानों के मैदान किराए अथवा सहयोग से लेने पड़ते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस खेल का मैदान स्कूल में है ही नहीं, उसकी तैयारी विद्यार्थी पूरे साल कहां करें? प्रतियोगिता के समय कुछ दिनों के लिए मैदान उपलब्ध कराने से खिलाड़ी तैयार नहीं होते। इसके लिए पूरे साल नियमित अभ्यास की जरूरत होती है।

नियमित अभ्यास जरूरी

अलवर जिले के 11 ब्लॉकों में संचालित कई सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास पर्याप्त खेल मैदान तो दूर, स्कूल के नाम पर्याप्त जमीन तक उपलब्ध नहीं है। जहां जमीन उपलब्ध है, वहां भी हर खेल के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं विकसित नहीं की गई हैं। ऐसे में खेल गतिविधियां कई बार केवल प्रतियोगिता तक सीमित रह जाती हैं।

जहां मैदान उपलब्ध हैं, वहां भी क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी, खो-खो और एथलेटिक्स सहित कई खेलों की गतिविधियां संचालित होती हैं। तैराकी, जिम्नास्टिक, स्केटिंग, तीरंदाजी और बॉक्सिंग के लिए अलग तरह की संरचना, उपकरण और प्रशिक्षकों की जरूरत होती है। इन खेलों में प्रतिभाओं को तैयार करने के लिए मैदान के साथ प्रशिक्षक, उपकरण, सुरक्षा व्यवस्था और नियमित अभ्यास जरूरी है। केवल प्रतियोगिता के समय मैदान उपलब्ध कराने से खिलाड़ियों की तैयारी पूरी नहीं हो सकती।

ब्लॉक स्तर पर बन सकते हैं खेल हब

हर सरकारी स्कूल में सभी खेलों की सुविधाएं विकसित करना संभव नहीं हो, तो ब्लॉक स्तर पर खेल हब बनाए जा सकते हैं। चयनित सरकारी स्कूलों में अलग-अलग खेलों की सुविधाएं विकसित कर आसपास के स्कूलों के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा सकता है। इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विद्यार्थियों को निजी अकादमियों पर निर्भरता कम होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को नियमित प्रशिक्षण और प्रतियोगिता तक पहुंचने का अवसर मिल सकेगा।

Updated on:
24 Sept 2026 11:46 am
Published on:
24 Sept 2026 11:46 am