
अगर आप अलवर, बहरोड़, खैरथल या कोटपूतली के रास्तों पर सफर करते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। अब इन रूटों पर गाड़ियों के टायर गड्ढों में नहीं हिचकोले खाएंगे, बल्कि गाड़ियां फर्राटा भरती नजर आएंगी। सरकार ने दो बड़ी सड़कों की कायाकल्प करने की तैयारी पूरी कर ली है। RSRDC ने इसके लिए बकायदा टेंडर भी जारी कर दिए हैं, जिससे लाखों लोगों का सफर न सिर्फ आसान होगा बल्कि समय की भी भारी बचत होगी।
फिलहाल अलवर, सोडावास, बहरोड़ से होते हुए हरियाणा के नारनौल बॉर्डर तक जाने वाली सड़क की हालत बेहद खस्ता है। महज 50 किलोमीटर का यह छोटा सा सफर पूरा करने में लोगों के पसीने छूट जाते हैं और करीब दो घंटे का लंबा वक्त बर्बाद होता है। इतना ही नहीं, टूटी सड़क की वजह से आए दिन हादसे भी होते रहते हैं। अब सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए ₹53 करोड़ का बजट मंजूर किया है। टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे यह 50 किमी का सफर जल्द ही सुगम और सुरक्षित हो जाएगा।
इसी तरह किशनगढ़बास, खैरथल, बानसूर से कोटपूतली तक जाने वाला 62 किलोमीटर का मार्ग भी पूरी तरह जर्जर हो चुका है। खास बात यह है कि इस मार्ग से दो नए बने जिले 'खैरथल-तिजारा' और 'कोटपूतली-बहरोड़' आपस में जुड़ते हैं। हर दिन यहां से लाखों लोग अपने काम के सिलसिले में गुजरते हैं, लेकिन खराब सड़क के चलते उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लंबे प्रयासों के बाद आखिरकार इस टू-लेन (Two-lane) सड़क की मरम्मत के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब ₹48 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
इस बड़ी खुशखबरी के बीच एक मायूस करने वाली खबर भी है। राज्य सरकार ने पहले अलवर से बहरोड़ मार्ग को शानदार 'फोरलेन' (Four-lane) बनाने की योजना बनाई थी। इसके लिए ₹482 करोड़ की एक विस्तृत रिपोर्ट (DPR) तैयार कर सरकार को भेजी गई थी।
लेकिन बजट बहुत ज्यादा होने के कारण सरकार ने इस भारी-भरकम प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया। अगर यह फोरलेन बनता तो इलाके की सूरत बदल जाती, लेकिन फिलहाल सरकार भारी-भरकम बजट से पीछे हट गई है और अब केवल पैचवर्क व मरम्मत का काम कराकर ही काम चलाया जाएगा। इसके बावजूद, सड़क ठीक होने से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत जरूर मिलेगी।