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Alwar: अलवर के ऐतिहासिक जयसमंद बांध का बदलेगा रूप, 4 करोड़ से होगा जीर्णोद्धार

अलवर के जयसमंद बांध की सूरत अब जल्द ही बदलने वाली है। सरकार ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी योजना के तहत इसके कायाकल्प के लिए 4 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। बांध की पाल, छतरियों और गेस्ट हाउस को संवारकर इसे एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।
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Sep 28, 2026
alwar jaysamand dam
जयसमंद बांध (फोटो - पत्रिका)

अलवर में जयसमंद बांध के जीर्णोद्धार के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी योजना के तहत 4 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसे बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत बांध की पाल की पिचिंग दुरुस्त करने से लेकर डाउन स्ट्रीम में ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने तक के काम होंगे। पाल पर बने गेस्ट हाउस की मरम्मत और रंग-रोगन के साथ परिसर को संवारा जाएगा। बांध की पाल के ऊपर और नीचे उगी झाड़ियों व अनावश्यक पेड़ों को हटाया जाएगा।

कार्यों को मंजूरी

पानी की निकासी को व्यवस्थित करने के लिए ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने के साथ मिट्टी का काम भी कराया जाएगा। पाल पर बनी छतरियों की मरम्मत और रंग-रोगन सहित अन्य विकास कार्य भी प्रस्तावित हैं। इस काम के लिए अलवर यूआइटी 2 करोड़ 25 लाख और जिला परिषद 1 करोड़ 75 लाख रुपए देगी। कार्यकारी एजेंसी जल संसाधन विभाग को बनाया गया है। प्रस्तावित कार्यों को मंजूरी मिल चुकी है। प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया जारी है। स्वीकृतियां मिलने के बाद टेंडर जारी होंगे और इसके बाद काम शुरू कराया जाएगा।

पहले भी हुआ था कायाकल्प, देखरेख करना भूले

जयसमंद बांध की पाल का पहले भी कायाकल्प कराया गया था। इसके बाद यहां लोगों की आवाजाही बढ़ी थी, लेकिन नियमित देखरेख के अभाव में लगाए गए पेड़-पौधे सूख गए और परिसर की सुंदरता धीरे-धीरे कम हो गई। वर्तमान में भी यहां लोग पहुंचते हैं। खासकर युवा छतरियों पर बैठकर फोटो और सेल्फी लेते हैं। बांध में पानी भरने पर यह क्षेत्र पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने की संभावनाएं रखता है। एक कतार में बनी छतरियां यहां आने वाले लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं।

वर्ष 1910 में बना, 1917 में टूटा और 1924 में फिर तैयार हुआ

जयसमंद बांध का निर्माण पूर्व महाराजा जयसिंह ने वर्ष 1910 में कराया था। इसका उद्देश्य आसपास के गांवों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के साथ क्षेत्र को विकसित करना था। वर्ष 1917 में तेज बारिश के बाद बांध टूट गया, जिसे वर्ष 1924 में दोबारा बनाया गया। बांध परिसर में करीब 14 छतरियां बनी हुई हैं। वर्ष 1977 में सरकार की ओर से यहां गेस्ट हाउस का निर्माण कराया गया था। वहीं, इस मानसून सीजन में इसमें पानी नहीं आया। इस वजह से बांध सूख पड़ा है।

Updated on:
28 Sept 2026 11:28 am
Published on:
28 Sept 2026 11:28 am