
अलवर। नगर निगम में शुक्रवार सुबह करीब 7.30 बजे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में वन राज्यमंत्री संजय शर्मा का देर से आना, फिर गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद तत्काल वहां से चले जाना… यहां तक तो सब कुछ ठीक था, लेकिन मेयर सुमनलता अग्रवाल के पति अजय अग्रवाल का उन्हें रोकने के लिए गाड़ी के पीछे दौड़ना, गाड़ी के शीशे को नॉक करना, लेकिन इसके बावजूद मंत्री की गाड़ी का न रुकना… चर्चा का विषय बन गया।
दावा किया जा रहा है कि वन राज्यमंत्री संजय शर्मा के पहुंचने से पहले ही मेयर सुमनलता अग्रवाल और आयुक्त लक्ष्मीकांत कटारा ने अनुकंपा नियुक्ति के प्रमाण पत्र व सफाई कर्मियों को प्रशंसा पत्र बांट दिए। जब मंत्री संजय शर्मा वहां पहुंचे, तो कार्यक्रम की अधिकतर औपचारिकताएं पूरी हो चुकी थीं। इससे नाराज मंत्री संजय शर्मा वहां गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर रवाना होने लगे। अलवर मेयर के पति अजय अग्रवाल उन्हें रोकने के लिए गाड़ी के पीछे दौड़े। गाड़ी के शीशे को नॉक किया, लेकिन न गाड़ी रुकी और न उसका शीशा खुला। यह नजारा देख वहां मौजूद सभी लोग हैरत में पड़ गए। तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई, क्योंकि मेयर व मंत्री दोनों ही एक ही राजनीतिक दल यानि भाजपा से जुड़े है।
मंत्री की नाराजगी और उनके इस तरह कार्यक्रम से लौटने को लेकर शहर में कई तरह की चर्चाएं हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग अपने-अपने हिसाब से कयास लगा रहे हैं। यह भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या सिर्फ यही वजह थी, जो नजर आई या फिर मंत्री की नाराजगी की कोई भी वजह है? कुछ लोग यह भी दावा कर रहे हैं कि प्रोटोकॉल के तहत नगर निगम के गेट पर आयुक्त या मेयर का होना जरूरी था, लेकिन दोनों गेट पर नहीं मिले, इसलिए मंत्री नाराज हुए।
गांधी जयंती पर नगर निगम परिसर में हर साल कार्यक्रम होता है। शहर विधायक व मंत्री होने के नाते संजय शर्मा हर बार इस कार्यक्रम में पहुंचते हैं और कार्यक्रम में बतौर अतिथि शामिल होते हैं। इस बार भी मंत्री संजय शर्मा को इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे कुछ देरी से पहुंचे। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कार्यक्रम में वन राज्यमंत्री संजय शर्मा को भी आमंत्रित किया गया था।
नगर निगम के चुनाव से पहले सफाईकर्मियों को नियुक्ति देने की मांग को लेकर वन राज्यमंत्री संजय शर्मा निगम परिसर में धरने पर बैठ गए थे। इससे पूर्व सीकर में सेवा शिविर के निरीक्षण के दौरान तत्कालीन सीकर कलेक्टर मुकुल शर्मा से नाराज हुए थे।