
अलवर नगर निगम के आगामी चुनावों की बिसात बिछ चुकी है। मिनी सचिवालय में पूरी पारदर्शिता के साथ जिला कलक्टर आर्तिका शुक्ला की मौजूदगी में सभी 65 वार्डों के आरक्षण का निर्धारण लॉटरी के जरिए किया गया। इस लॉटरी के बाद शहर के कई वार्डों के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। कई दिग्गज नेताओं की सीटें आरक्षित होने से उनके चुनावी समीकरण बिगड़े हैं, तो वहीं नए चेहरों और महिला प्रत्याशियों के लिए राजनीति के नए रास्ते खुल गए हैं।
लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आम लोगों और कार्यकर्ताओं के मन में आरक्षण की श्रेणियों को लेकर कई सवाल रहते हैं। इसे आसान शब्दों में इस तरह समझा जा सकता है:
अनारक्षित (GEN) ओपन: यह सीट पूरी तरह खुली होती है। यहां सामान्य, ओबीसी, एससी या एसटी वर्ग का कोई भी पुरुष या महिला चुनाव लड़ सकता है।
अनारक्षित (GEN) महिला: इस सीट पर किसी भी वर्ग (सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी) की महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतर सकती है।
ओबीसी ओपन: इस सीट पर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का कोई भी पुरुष या महिला दावेदार हो सकता है।
ओबीसी महिला: यह सीट केवल और केवल ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए तय होती है।
एससी ओपन व एससी महिला: एससी ओपन पर अनुसूचित जाति का कोई भी पुरुष या महिला प्रत्याशी बन सकता है, जबकि एससी महिला सीट पर सिर्फ इसी वर्ग की महिला चुनाव लड़ेगी।
एसटी ओपन व एसटी महिला: एसटी ओपन सीट पर अनुसूचित जनजाति के पुरुष या महिला दोनों पात्र होते हैं, जबकि एसटी महिला सीट पर केवल इसी वर्ग की महिला प्रत्याशी हो सकती है।
लॉटरी निकलने के बाद अब राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। शहर के प्रमुख चौराहों और चाय की थड़ियों पर चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा केंद्र बिंदु नगर निगम के महापौर (मेयर) पद का आरक्षण रहा। अलवर नगर निगम में मेयर की सीट अनारक्षित (GEN) महिला वर्ग के लिए तय हुई है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस पद पर किसी भी जाति या वर्ग की महिला चुनाव लड़ सकती है। इसके लिए सिर्फ सामान्य वर्ग की महिला होना जरूरी नहीं है, बल्कि एससी, एसटी या ओबीसी वर्ग की महिलाएं भी सामान्य महिला सीट पर अपनी दावेदारी ठोक सकती हैं। इसके साथ ही निगम के कुल 65 वार्डों में से 13 वार्ड सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं।