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अलवर पंचायत चुनाव: भूपेंद्र यादव और टीकाराम जूली समेत इन दिग्गजों की साख दांव पर

अलवर में पंचायत राज चुनावों की आचार संहिता लागू होने के साथ ही गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुकाबला सिर्फ ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के प्रत्याशियों तक सीमित नहीं रहेगा। बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर मानी जा रही है और समर्थकों को एकजुट रखना चुनौती होगी।
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अलवर पंचायत राज चुनावों की आचार संहिता प्रभावी होने के साथ ही पंचायत समिति, ग्राम पंचायत और जिला परिषद चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इन चुनावों में केवल स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ही प्रतिष्ठा दाव पर नहीं है, बल्कि जिले के बड़े कांग्रेस और भाजपा नेताओं के लिए भी यह चुनाव सियासी ताकत के प्रदर्शन का मौका माना जा रहा है। ग्राम पंचायत से लेकर प्रधान और जिला प्रमुख तक के चुनाव में दिग्गज नेताओं की भूमिका अहम रहने वाली है।

भूपेंद्र यादव

केंद्र सरकार में मंत्री और अलवर लोकसभा क्षेत्र से सांसद भूपेंद्र यादव की प्रतिष्ठा भी इन पंचायत राज चुनावों से जुड़ी हुई है। अलवर के साथ-साथ खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ क्षेत्र में भी प्रधान और जिला प्रमुख बनाने में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है।

टीकाराम जूली

राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और अलवर ग्रामीण विधायक टीकाराम जूली की भूमिका भी इन चुनावों में अहम मानी जा रही है। जूली विधायक बनने से पहले वर्ष 2005 में अलवर के जिला प्रमुख रह चुके हैं। इसके बाद वे विधायक बने और राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे।

डॉ. जसवंत यादव

अलवर की पंचायत की राजनीति में पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. जसवंत यादव को लंबे समय से प्रभावशाली नेताओं में माना जाता रहा है। वर्ष 1995 में डॉ. जसवंत यादव स्वयं जिला प्रमुख बने थे। इसके बाद वर्ष 2000 में उन्होंने अपनी पत्नी डॉ. किरण यादव को जिला प्रमुख बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

संजना जाटव

कांग्रेस के टिकट पर जिला परिषद सदस्य के रूप में चुनी गई और विधायक का चुनाव हार गईं, लेकिन लोकसभा चुनाव की तैयारियाें ने उन्हें विजेता बनाया। उनकी रणनीति को लेकर चर्चाएं दूर-दूर हैं। ऐसे में भरतपुर जिले के साथ-साथ अलवर की कठूमर व आसपास की पंचायत समितियों के चुनावों में वह अपना प्रभाव दिखा सकती हैं और उनकी भी प्रतिष्ठा दाव पर है।

इनकी भी प्रतिष्ठा दाव पर

थानागाजी क्षेत्र से सांसद मुरारीलाल मीणा, बानसूर क्षेत्र से सांसद राव राजेंद्र सिंह की भूमिका अपने-अपने क्षेत्रों में महत्वपूर्ण रहने वाली है। इसी तरह कांग्रेस विधायक कांतिलाल मीणा, मुंडावर विधायक ललित यादव, रामगढ़ विधायक सुखवंत सिंह, तिजारा विधायक बाबा बालकनाथ, किशनगढ़बास विधायक दीपचंद खैरिया, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ विधायक मांगे लाल मीणा और कठूमर विधायक रमेश खींची, बानसूर विधायक देवी सिंह शेखावत सहित कई अन्य नेताओं के लिए भी पंचायत राज चुनाव स्थानीय राजनीतिक प्रभाव का महत्वपूर्ण परीक्षण होंगे।

प्रधान से जिला प्रमुख तक होगी असली परीक्षा

इन चुनावों में राजनीतिक परीक्षा केवल जिला परिषद के परिणाम तक सीमित नहीं रहेगी। पंचायत समितियों में प्रधान बनाने से लेकर जिला परिषद में बहुमत जुटाकर जिला प्रमुख बनाने तक की पूरी प्रक्रिया में नेताओं की संगठनात्मक क्षमता, स्थानीय राजनीतिक समीकरण और समर्थकों को एकजुट रखने की क्षमता की परीक्षा होगी।