
अलवर नगर निगम के वार्ड पार्षद चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निर्वाचन संबंधी दस्तावेजों में लापरवाही सामने आई है। कुछ वार्डों के दस्तावेजों में हारे हुए प्रत्याशियों के नाम विजेता के रूप में दर्ज कर दिए गए। यह गलती आरओ और चुनाव ड्यूटी में लगे कार्मिकों के स्तर पर हुई बताई जा रही है।
हालांकि, मतदान परिणाम घोषित होने के समय वास्तविक विजेता प्रत्याशियों को ही जीत के प्रमाण पत्र दिए गए थे। ऐसे में प्रमाण पत्र और निर्वाचन दस्तावेजों में दर्ज जानकारी अलग-अलग होने से मामला सामने आया। अब संबंधित दस्तावेजों में दर्ज गलत जानकारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
वार्ड एक के चुनाव परिणाम से संबंधित दस्तावेजों (प्रारूप 22) में महेंद्र सिंह का नाम विजेता के रूप में दर्ज कर दिया गया, जबकि इस वार्ड से निर्दलीय प्रत्याशी राशिद खान ने जीत दर्ज की थी। इसी तरह वार्ड दो में भी परिणाम दर्ज करने के दौरान बड़ी चूक हुई। यहां भाजपा के विष्णु कुमार चुनाव जीते थे, लेकिन परिणाम की घोषणा से जुड़े दस्तावेज में गोकुल चंद सैनी का नाम विजेता के तौर पर लिख दिया गया।
निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े लोगों के अनुसार यह गलती परिणाम तैयार करने और दस्तावेजों में दर्ज करने के दौरान हुई। हालांकि इससे वास्तविक चुनाव परिणाम प्रभावित नहीं हुआ। दोनों वार्डों में जीत का प्रमाण पत्र वास्तविक रूप से चुनाव जीतने वाले प्रत्याशियों को ही सौंपा गया है। परिणाम की घोषणा वाले दस्तावेजों में कुछ हारे हुए अन्य नाम भी दर्ज किए गए थे, जो बाद में काटकर सही किए गए हैं। यानी परिणाम दर्ज करते समय हड़बड़ी की गई और क्रॉस जांच नहीं हुई। इस संबंध में आरओ अम्बा लाल मीणा से संपर्क किया गया, लेकिन रिसीव नहीं किया।
ऐसे में अब सवाल यह उठ रहा है कि जब परिणाम से जुड़े दस्तावेज भविष्य में अधिकारिक रिकॉर्ड के तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं, तो उनमें इस तरह की गंभीर त्रुटि कैसे रह गई? चुनाव परिणामों की घोषणा और दस्तावेज तैयार करने में बरती गई लापरवाही ने निर्वाचन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों को इन दस्तावेजों में हुई गलतियों को दुरुस्त करना होगा, ताकि भविष्य में किसी तरह का भ्रम पैदा न हो।