
सिलीसेढ़ झील (फाइल फोटो)
अलवर में इस बार मानसून ने औसत बारिश का आंकड़ा तो पार कर लिया, लेकिन पिछले तीन वर्षों की तुलना में बारिश कम रही। जिले में अब तक 563 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य औसत 544 मिमी है। वर्ष 2025 में 730 मिमी, 2024 में 995 मिमी और 2023 में 605.63 मिमी बारिश हुई थी। ऐसे में इस साल की बारिश 2023 के बाद सबसे कम है।
बारिश की कमी का असर जिले के बांधों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अलवर के 129 बांधों में से 118 अभी भी सूखे हैं। सिर्फ 11 बांधों में पानी की आवक हुई है। बारिश कई जगह तेज हुई, लेकिन कम समय में ज्यादा पानी गिरने के कारण उसका पर्याप्त संचय नहीं हो सका। वहीं, बड़े जलग्रहण क्षेत्रों से लगातार पानी नहीं आने के कारण भी बांधों में पानी का स्तर नहीं बढ़ पाया।
जिले की प्रमुख रूपारेल नदी में इस मानसून के दौरान एक बार पानी आया, लेकिन बाद में इसका प्रवाह आगे नहीं बढ़ सका। जयसमंद बांध में भी पूरे मानसून सीजन के दौरान पर्याप्त पानी की आवक नहीं हुई। सिलीसेढ़ बांध की स्थिति भी इस बार संतोषजनक नहीं रही। बांध अपनी भराव क्षमता तक नहीं पहुंच पाया।
सिलीसेढ़ में हर साल मानसून के बाद चादर चलने का लोगों को इंतजार रहता है। इस बार पर्याप्त पानी नहीं आने के कारण यह इंतजार भी पूरा नहीं हो सका। बांधों में पानी की कमी का असर सिर्फ जलस्रोतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले महीनों में इसका प्रभाव पेयजल और सिंचाई पर भी पड़ सकता है।
बांधों में पर्याप्त पानी जमा नहीं होने से आगामी गर्मी में पानी की किल्लत बढ़ने की आशंका है। पेयजल स्रोतों पर दबाव बढ़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के लिए भी पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में किसानों की भूजल पर निर्भरता और बढ़ने की संभावना है।
बारिश का पर्याप्त पानी जमीन में नहीं उतरने से भूजल रिचार्ज भी बेहतर नहीं हो सका। कई क्षेत्रों में लगातार भूजल दोहन के कारण जलस्तर पहले ही नीचे जा रहा है। ऐसे में बांधों और अन्य जलस्रोतों में पानी की कमी के साथ कमजोर भूजल रिचार्ज आने वाले महीनों में अलवर के लिए पानी की चुनौती बढ़ा सकता है।
Updated on:
20 Sept 2026 11:25 am
Published on:
20 Sept 2026 11:25 am
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