उदयनाथ की पहाड़ी से लेकर नटनी का बारा होते हुए जयसमंद तक जल संसाधन खंड ने ड्रोन सर्वे शुरू करवा दिया है। इसकी डीपीआर बनेगी। इस रास्ते में आने वाले अतिक्रमण हटाए जाएंगे।
उदयनाथ की पहाड़ी से लेकर नटनी का बारा होते हुए जयसमंद तक जल संसाधन खंड ने ड्रोन सर्वे शुरू करवा दिया है। इसकी डीपीआर बनेगी। इस रास्ते में आने वाले अतिक्रमण हटाए जाएंगे। इससे रिसॉर्ट व रेस्टोरेंट संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। उदयनाथ की पहाड़ी से रूपारेल नदी आती है, जो नटनी का बारा होते हुए जयसमंद बांध तक पानी ले जाती है।
इस पानी पर 45 फीसदी अलवर व 55 फीसदी भरतपुर का हक है, लेकिन तमाम लोगों ने नटनी का बारा व उसके आसपास रिसॉर्ट व रेस्टोरेंट बना लिए हैं, जिससे पानी का बहाव अलग हो गया और जयसमंद में पानी पहुंचने की बजाय सीधे भरतपुर जा रहा है। एक्सपर्ट के जरिए इसका खुलासा राजस्थान पत्रिका ने किया तो जल संसाधन खंड ने ड्रोन सर्वे शुरू करवा दिया।
जानकारों का कहना है कि नटनी के बारा के आसपास दर्जनों की संख्या में रिसॉर्ट व रेस्टोरेंट बने हैं। इनमें अधिकांश का संचालन अवैध तरीके से हो रहा है। यह एरिया सरिस्का का है। ऐसे में कॉमर्शियल गतिविधि के लिए अनुमति लेनी होगी। अलवर तहसील के अंतर्गत यह आता है। इसकी चिंता न प्रशासन ने की और न जल संसाधन खंड ने। सरिस्का प्रशासन को तो खुद ही नहीं पता कि उनकी जमीन कहां-कहां है। ऐसे में अब ड्रोन सर्वे से सभी अतिक्रमण बाहर आएंगे और जल संसाधन खंड कार्रवाई करेगा।