
अलवर. चोरी व नकबजनी के मामलों में शातिरों की मु_ी खुलवाने में पुलिस नाकाम साबित हो रही है। अपराध के बाद पुलिस भागदौड़ कर अपराधी को दबोच तो लेती है, लेकिन उससे माल की बरामदगी हमेशा चैलेन्ज बनी रहती है। सच्चाई ये है कि आधे से अधिक मामलों में पुलिस को बिना माल के संतोष करना पड़ता है। इससे अपराधी की गिरफ्तारी के बाद पीडि़त की माल मिलने की उम्मीदें धराशायी हो रही हैं।
ताजा मामला अलवर में एक के बाद एक चेन स्नेचिंग की वारदातों का है। पुलिस ने भागदौड़ कर इन अपराधियों को पकड़ तो लिया, लेकिन उनसे माल की बरामदगी फिलहाल नहीं हो सकी है। इससे सबसे ज्यादा उन महिलाओं में निराशा है, जिन्हें आरोपितों की गिरफ्तारी से अपनी चेन मिलने की उम्मीद जगी थी।
माल बरामदगी पर नहीं जोर
आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस का माल बरामदगी पर जोर पिछले कुछ सालों में कम हुआ है। इसका सबसे बड़ा कारण पुलिस का अपराधियों पर थर्ड डिग्री इस्तेमाल से बचना है। जानकारों की मानें तो पुलिस कस्टडी में अपराधियों की मौत के बाद मानवाधिकार आयोग सहित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के कई मामले सामने आ चुके हैं। इससे पुलिस बैकफुट पर चली गई है। अब वह केवल अपराधी की गिरफ्तारी पर जोर देने लगी है।
अलवर में केवल 54 प्रतिशत माल बरामद
वारदात के बाद माल बरामदगी की बात करें तो अलवर पुलिस अन्य जिलों की पुलिस से बेहतर साबित हो रही है। पिछले साल अलवर पुलिस का नकबजनी के मामलों में माल बरामदगी प्रतिशत 54 रहा है। जो कि प्रदेश के कई जिलों से बेहतर है। वर्ष 2016 में भी अलवर पुलिस की माल बरामदगी 52 प्रतिशत रही। वहीं, लूट के मामलों में अलवर पुलिस का माल बरामदगी प्रतिशत 72 है। यानि 72 प्रतिशत मामलों में पुलिस ने आरोपित व उससे माल दोनों बरामद किए हैं।
अलवर पुलिस का अपराधी की गिरफ्तारी के साथ उससे माल बरामदगी पर भी जोर रहता है। हमारा माल बरामदगी प्रतिशत कई जिलों से बेहतर है। हमनें कई चोरी का माल खरीदने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की है।
राहुल प्रकाश, जिला पुलिस अधीक्षक अलवर।