
अलवर शहर और सिलीसेढ़ क्षेत्र में करीब डेढ़ घंटे तक तेज बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार यहां 13 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा बानसूर में 5 मिमी, जयसमंद में 12 मिमी और नौगांवा में 5 मिमी वर्षा दर्ज की गई। बारिश के बाद तापमान में गिरावट आई और लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली, लेकिन थोड़ी ही देर में राहत आफत में बदल गई। शहर की प्रमुख सड़कें जलभराव के कारण तालाब जैसी नजर आने लगीं।
दूसरी तरफ बारिश के बाद पर्यटन स्थल किशन कुंड पानी से लबालब भर गया। कुंड में पानी भरते ही वहां स्थानीय बच्चों और युवाओं की भीड़ जमा हो गई। बिना किसी डर के युवा और बच्चे कुंड के ऊंचे पत्थरों से पानी में छलांग लगाकर नहाते रहे। लबालब भरे कुंड में इस तरह बिना सुरक्षा कूदना बेहद खतरनाक है और इससे किसी बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेते हुए किशन कुंड पर सुरक्षा गार्ड तैनात करने चाहिए। साथ ही हादसों को रोकने के लिए वहां मजबूत बैरिकेडिंग की जानी चाहिए। शहर में जल निकासी के पुख्ता इंतजाम न होने से पहली ही तेज बारिश ने नगर परिषद के दावों की हवा निकाल दी है। अगर आने वाले दिनों में और तेज बारिश होती है, तो अलवर शहर के हालात और अधिक चिंताजनक हो सकते हैं।
बारिश का सबसे खराब असर सामान्य अस्पताल और पुरानी कचहरी परिसर में देखने को मिला। सामान्य अस्पताल के मुख्य द्वार पर भारी जलभराव हो जाने से मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। बीमार मरीजों को गंदे पानी के बीच से निकालकर ले जाने को मजबूर दिखे। यही हाल शहर के मुख्य बाजारों और पुरानी कचहरी का रहा, जहां दुकानों के बाहर पानी जमा हो गया।
अलवर शहर के स्वर्ग रोड पर तो हालात इतने खराब थे कि सड़क पर दरिया बहता दिखा। ताज्जुब की बात यह है कि प्रशासन ने कुछ ही दिन पहले यहाँ बड़े नाले की सफाई कराने का दावा किया था। लेकिन बारिश होते ही सारे दावे खोखले साबित हो गए। पानी में कई गाड़ियां बंद होकर फंस गईं, जिससे लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। लोग गंदे पानी से होकर निकलने की कोशिश में फिसलकर गिरते भी नजर आए।